हनुमानगढ़ टाउन के गुरुद्वारा सिंग सभा मैं आज सिक्ख पंथ की पांचवी पातशाही श्री गुरु अर्जुन देव जी का शहीदी दीहाड़ा बहुत ही श्रद्धा भाव से मनाया गया । इस मौके पर गुरुद्वारा के मुख्य सेवादार जगजीत सिंह कपूर टोनी ने बताया हनुमानगढ़ टाउन के गुरुद्वारा सिंग सभा में आज पंचमी पातशाही श्री गुरु अर्जन देव जी के 417 वें शहीदी दिवस पर गुरूद्वारा साहिब में रखे गये श्री अखण्ड पाठ के भोग आज सुबह 9.15 बजे डाले गये हैडग्रंथी भाई गुरचरण सिंह जुगनू ने ईलाके कि सुख स्मृद्वि व अंपसी भाई चारे कि अरदास कि,तदउरान्त बाहर से पधारे ढाडी जत्था ज्ञानी मखन सिंह गिल व रागी जत्था भाई गुरमैल सिंह ने गुरू के इतिहास के बारे में बताया उन्होने कहा गुरु अर्जन देव पांचवें सिख गुरु थे । उन्होने धर्म कि रक्षा के लिये मुगल बादशाह जहांगीर के आदेश पर 16 जून 1606 को मार दिया गया था। जब मुगल बादशाह जहांगीर ने गुरु अर्जन देव को लाहौर के किले में गिरफ्तार करने का आदेश दिया था।
ऐसा कहा जाता है कि लोगों पर उनके बढ़ते प्रभाव और इस प्रकार सिख धर्म के प्रभाव के कारण उन्हें गिरफ्तार किया गया था। गुरु अर्जन देव ने जहांगीर के विद्रोही बेटे खुसरो को आशीर्वाद दिया, जिससे मुगल राजा क्रोधित हो गया और उसने उसे तुरंत फांसी पर चढ़ाने का आदेश दिया। उसकी मौत बेहद दर्दनाक और अकल्पनीय थी। गुरु अर्जन देव को जलती हुई तवे पर बैठाया गया और उन पर गर्म रेत डाली गई। फिर उन्हें नदी में नहलाया गया और मरने से पहले पांच दिनों तक लगातार यातनाएं दी गईं। उनकी मृत्यु के बाद, उनके बेटे गुरु हरगोबिंद सिंह ने सिखों के छठे गुरु के रूप में उनका स्थान लिया। कथावाचक ने सभी साधसंगत से कहा कि गुरू जी दिखाये रास्ते पर चलकर ही अपने जीवन रूपी नाव को भवसागर से पार लगाया जा सकता है । अन्त में गुरू का लंगर अटूट वितरण किया गया। मंुख सेवादार कपूर ने बताया सुबह से ही ठण्डे मिठे पानी कि छबील गुरूद्वारा कि मुख्य डयोडी पर लगाई गई, जिसमें हजारो राहगीरो ने ठण्डा मिठा जल पीकर अपनी प्यास बुझाई। इस मौके पर सुलखन सिंह मसौन,हरमेल सिंह,प्यारा सिंह,अमरजीत सिंह,गुरपाल सिंह,भगत सिंह, नरेश कोचर,परमजीत सिंह व बीबी जत्था जिन्होने लगातार 40 दिन श्री सुखमणी साहिब का पाठ किया वह भी उपस्थित थी ।
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