बिहार (Bihar Crime) एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार वजह किसी विकास परियोजना या चुनावी रणनीति नहीं, बल्कि वह खौफनाक अपराध हैं जो दिनदहाड़े अस्पतालों, सड़कों और गाँवों में अंजाम दिए जा रहे हैं। जुलाई 2025 में जिस रफ्तार से हत्या के मामले सामने आए हैं, उसने नीतीश कुमार सरकार के ‘सुशासन’ के दावों को सीधी चुनौती दे दी है। हालात इतने भयावह हैं कि अब सवाल यह नहीं कि अपराध क्यों हो रहा है, बल्कि यह है कि क्या राज्य में अपराध रोकने की कोई मंशा बची भी है या नहीं।
13 जुलाई को पटना के पारस अस्पताल में हुए चंदन मिश्रा हत्याकांड ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया। ICU में भर्ती एक गैंगस्टर को पाँच हमलावरों ने पुलिस की मौजूदगी के बावजूद गोलियों से भून दिया। वीडियो वायरल हुआ, लेकिन चर्चा पुलिस के एक्शन से नहीं, उसकी निष्क्रियता और सवालों से हुई। इसी दिन, छपरा में एक शिक्षक को दिन में गोली मार दी गई। कैमरे में अपराधी हथियार लहराते दिखे, लेकिन पुलिस अब तक खाली हाथ है।
बिहार पुलिस मुख्यालय के अनुसार, जुलाई के पहले 15 दिनों में ही हत्या के 50 से अधिक मामले सामने आए हैं। इससे पहले जून 2025 में 292 हत्या केस दर्ज हुए थे। इसका मतलब यह है कि हर दिन बिहार में औसतन 10 से 12 लोग मारे जा रहे हैं। इन घटनाओं में घरेलू विवाद, पंचायत हिंसा, राजनीतिक रंजिश और गैंगवार शामिल हैं। लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि अब अस्पतालों तक में अपराधियों का मनोबल इतना बढ़ गया है कि वे ICU में दाखिल होकर हत्या कर रहे हैं और फरार भी हो जाते हैं।
ये भी पढ़ें: Bihar Bandh: बिहार में वोटर वेरिफिकेशन पर सियासी बवाल: सड़कों पर उतरे राहुल-तेजस्वी
पुलिस ने कैसे बना दिया किसानों को बलि का बकरा?
इन सबके बीच पुलिस और प्रशासन की प्रतिक्रिया ने आग में घी डालने का काम किया। बिहार के ADG लॉ एंड ऑर्डर कुंदन कृष्णन ने मीडिया से बातचीत में कहा कि अपराध में वृद्धि का एक कारण किसानों की बेरोज़गारी भी हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि जब खेतों में काम नहीं होता, तो ग्रामीण इलाके के युवा ‘कॉन्ट्रैक्ट किलिंग’ जैसे काम में जुड़ सकते हैं। यह बयान न सिर्फ विवादास्पद है, बल्कि बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की गरिमा पर सीधा प्रहार माना जा रहा है।
राजनीतिक हलकों में इस बयान की तीखी आलोचना हुई। कांग्रेस ने इसे राज्य की विफल कानून व्यवस्था पर पर्दा डालने की कोशिश बताया। राजद नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि सरकार अपराध रोकने में नाकाम रही है, इसलिए अब पुलिस किसानों को बलि का बकरा बना रही है। वहीं, जनता के बीच इस बयान को लेकर गुस्सा है। सोशल मीडिया पर यह सवाल बार-बार उठ रहा है कि अगर पुलिस किसानों से डरती है, तो फिर अपराधियों से क्या कोई गठजोड़ है?
हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ने के लिए यहां क्लिक करें

बिहार में 16 दिन में ही 60 से ज्यादा लोगों की हत्या
बिहार में अपराध का ग्राफ एक बार फिर डरावने मोड़ पर है। जुलाई 2025 के पहले 16 दिन में ही राज्य में 60 से ज्यादा लोगों की हत्या हो चुकी है, यानी हर छह घंटे में एक जान जा रही है। यह सिर्फ एक राज्य का क्राइम रिकॉर्ड नहीं, बल्कि पूरे प्रशासनिक ढांचे पर गंभीर सवाल है। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि ये हत्याएं अब सिर्फ सुदूर गांवों तक सीमित नहीं हैं।
अस्पताल, कोर्ट परिसर, बाजार और राष्ट्रीय राजमार्ग तक अब अपराधियों की गिरफ्त में हैं। बिहार पुलिस मुख्यालय से प्राप्त आँकड़े यह दिखाते हैं कि राज्य में औसतन हर महीने 229 हत्या होती हैं, और यह संख्या लगातार बढ़ रही है। जबकि सरकार अपराध पर कार्रवाई के दावे कर रही है, ज़मीनी हकीकत यह है कि अपराधी न सिर्फ बेखौफ हैं, बल्कि पुलिस-प्रशासन की मौजूदगी में वारदात को अंजाम दे रहे हैं।
| महीना | दर्ज हत्या मामले | औसत प्रति दिन हत्या |
|---|---|---|
| जनवरी 2025 | 218 | 7.0 |
| फ़रवरी 2025 | 205 | 7.3 |
| मार्च 2025 | 223 | 7.1 |
| अप्रैल 2025 | 217 | 7.2 |
| मई 2025 | 284 | 9.2 |
| जून 2025 | 292 | 9.7 |
| जुलाई 2025 (1-16) | 60+ | 3.75 (अब तक) |
बिहार के इतिहास में कानून व्यवस्था को लेकर सवाल हमेशा रहे हैं। लेकिन 2005 के बाद नीतीश कुमार के नेतृत्व में जब ‘सुशासन’ शब्द गढ़ा गया, तो उम्मीदें जगी थीं कि राज्य अपराध से मुक्त होगा। कुछ सालों तक यह सच भी साबित हुआ। लेकिन पिछले दो वर्षों में जिस तरह अपराधियों का मनोबल बढ़ा है, वह संकेत देता है कि बिहार एक बार फिर उसी पुराने दौर की ओर लौट रहा है, जिसे कभी ‘जंगलराज’ कहा गया था।
यह सिर्फ चुनावी साल की हिंसा नहीं है। यह उस सिस्टम का पतन है, जिसमें शासन की प्राथमिकता विकास के बजाय सत्ता बनाए रखना बन गई है। जब मुख्यमंत्री से लेकर DGP तक अपराधों को ‘रूटीन केस’ बताकर टाल देते हैं, तब जनता में भरोसे की जगह डर घर कर जाता है।
ताजा अपडेट्स के लिए आप पञ्चदूत मोबाइल ऐप डाउनलोड कर सकते हैं, ऐप को इंस्टॉल करने के लिए यहां क्लिक करें.. इसके अलावा आप हमें फेसबुक, ट्विटर, इंस्ट्राग्राम और यूट्यूब चैनल पर फॉलो कर सकते हैं।




































