25 साल की लड़कियों पर अनिरुद्धाचार्य ने दिया अश्लील बयान, मथुरा में बवाल, देखिए VIDEO

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कथावाचक अनिरुद्धाचार्य (Aniruddhacharya) एक बार फिर विवादों में हैं। उनका एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें वे लड़कियों को लेकर आपत्तिजनक और अश्लील टिप्पणी करते नजर आ रहे हैं। अब मथुरा बार एसोसिएशन की महिला वकील इसको लेकर खासा नाराज हैं।

बार एसोसिएसन के सचिव और अध्यक्ष की मौजूदगी मे एक दल एसएसपी श्लोक कुमार के पास पहुंच गया और कथावाचक अनिरुद्धचार्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग कर डाली। आखिर उन्‍होंने ऐसा क्‍या कह डाला जिसके चलते विरोध हुआ।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में अनिरुद्धाचार्य कहते हैं – “25 साल की लड़की चार जगह मुंह मार चुकी होती है, पूरी जवान होकर आती है, और जब जवान होकर आएगी तो स्वाभाविक है कि उसकी जवानी फिसल जाएगी।” वे एक युवती के हनीमून के उदाहरण का ज़िक्र करते हुए कहते हैं कि वह किसी और के साथ पहले रह चुकी थी।। लेकिन वह पहले से किसी और के साथ रह चुकी थी। अनिरुद्धाचार्य इस बात की दलील दे रहे थे कि लड़कियों की शादी 16 साल से पहले कर देनी चाहिए।

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भारतीय कानून के मुताबिक, लड़कियों की शादी की कानूनी उम्र 18 साल और लड़कों की 21 साल है। अब अनिरुद्धाचार्य के लिए सोशल मीडिया पर इस बयान की तीखी आलोचना हो रही है। यूज़र्स इसे महिलाओं का चरित्र हनन बताकर अनिरुद्धाचार्य के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

बार एसोसिएशन ने की मीटिंग
महिलाओं पर दिए गए बयान के विरोध में बार एसोसिएशन के ऑफिस पर एक मीटिंग का आयोजन किया गया। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रदीप शर्मा की अध्यक्षता में हुई इस मीटिंग में निर्णय लिया गया कि अनिरुद्धाचार्य महाराज के खिलाफ CJM कोर्ट में 156/ 3 में मुकद्दमा दर्ज कराया जाएगा। जिसका सभी खर्चा बार एसोसिएशन करेगी।

 

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अनिरुद्धाचार्य के विवादित बयान, जिसपर मच चुका है बवाल: ये पहली बार नहीं है कि अनिरुद्धाचार्य महाराज के बयान पर विवाद हुआ इससे पहले भी वह कई बार मंचों से विवादित बयान दे चुके हैं-

  • भगवान शिव पर टिप्पणी (सितंबर 2024)
    उन्होंने अश्लील अंदाज़ में कहा कि “शिव, कृष्ण के साले हैं”, जिसे हिंदू धार्मिक भावनाओं के खिलाफ माना गया।
  • सीता–द्रौपदी की सुंदरता को दोष देना (2022)
    उनका कहना था कि माता सीता और द्रौपदी की “अत्यधिक सुंदरता” ही उनकी आपत्तिजनक स्थिति का कारण बनी यानी, उनकी सुंदरता ही उनका दोष थी।

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  • वाल्मीकि पर विवादित बयान (2022)
    उन्होंने महर्षि वाल्मीकि के जीवन और चरित्र पर ऐसी टिप्पणी की जो शास्त्रवादियों और धार्मिक समुदाय दोनों से विरोध झेल रही है।
  • ब्राह्मण समुदाय और संन्यास (जुलाई 2025)
    उनका यह कहना कि “सिर्फ ब्राह्मणों को ही संन्यास लेने का अधिकार है” राजनीतिक, सामाजिक और सार्वजनिक स्तर पर भड़काने वाला बयान बना।

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