Sawan Somvar Vrat Katha: भोलेनाथ को प्रसन्न करने की यह कथा हर भक्त को जाननी चाहिए

श्रद्धालु प्रातः स्नान कर व्रत का संकल्प लेते हैं। शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद और शुद्ध जल से अभिषेक किया जाता है। बेलपत्र, धतूरा, सफेद फूल अर्पित किए जाते हैं और “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप किया जाता है

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सावन का महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय होता है। इस पवित्र माह में हर सोमवार को श्रद्धालु उपवास रखते हैं और भोलेनाथ की पूजा-अर्चना करते हैं। मान्यता है कि सावन सोमवार का व्रत करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। इस व्रत की एक पौराणिक (sawan somvar vrat katha) कथा प्रचलित है जो श्रद्धालुओं के बीच बहुत प्रसिद्ध है।

व्रत कथा: एक गरीब ब्राह्मण की शिवभक्ति की परीक्षा
पौराणिक कथा के अनुसार, एक समय की बात है जब एक अत्यंत निर्धन ब्राह्मण अपने परिवार के साथ जीवनयापन कर रहा था। उसकी आर्थिक स्थिति बेहद खराब थी, लेकिन वह भगवान शिव का सच्चा भक्त था। एक दिन उसकी पत्नी ने उससे प्रश्न किया कि आखिर उनकी इस गरीबी से मुक्ति कब मिलेगी। ब्राह्मण ने उत्तर दिया कि वह सावन के महीने में सोमवार व्रत रखेगा और भोलेनाथ को प्रसन्न करने का प्रयास करेगा।

ब्राह्मण ने सावन के पहले सोमवार से व्रत आरंभ किया। पूरे दिन उपवास, शिवलिंग पर जलाभिषेक, बेलपत्र अर्पण और मंत्र जाप करते हुए उसने सोलह सोमवारों तक यह व्रत किया। आखिरी सोमवार की रात, भगवान शिव ने उसे स्वप्न में दर्शन दिए और कहा, “मैं तुम्हारी भक्ति से प्रसन्न हूं, वर मांगो।” ब्राह्मण ने अपने परिवार के लिए सुख, सम्मान और आध्यात्मिक समृद्धि की प्रार्थना की। भगवान शिव ने उसे आशीर्वाद दिया और उसके जीवन की दिशा बदल गई।

व्रत का महत्व और धार्मिक मान्यता
सावन सोमवार व्रत को स्त्रियां विशेष रूप से अपने पति की लंबी उम्र और परिवार की समृद्धि के लिए करती हैं। अविवाहित कन्याएं इस व्रत को योग्य वर की प्राप्ति हेतु रखती हैं। शास्त्रों के अनुसार, यह व्रत संतान सुख, आर्थिक समृद्धि और कष्टों से मुक्ति देने वाला माना गया है।

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व्रत की विधि
श्रद्धालु प्रातः स्नान कर व्रत का संकल्प लेते हैं। शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद और शुद्ध जल से अभिषेक किया जाता है। बेलपत्र, धतूरा, सफेद फूल अर्पित किए जाते हैं और “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप किया जाता है। व्रत कथा का पाठ कर शाम को आरती और प्रसाद वितरण के बाद व्रत खोला जाता है।

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