सुबह उठते ही दिखें ये 6 लक्षण, तो समझ जाए आपको Thyroid है, जानें इसके बारें सबकुछ

669

थायराइड (Thyroid) से जुड़ी बीमारियां भारत में तेजी से बढ़ रही हैं। खासकर महिलाओं में इसका प्रभाव अधिक देखा जा रहा है। अनुमान है कि देश में हर 10 में से 1 व्यक्ति किसी न किसी रूप में थायराइड की समस्या से ग्रस्त है। जीवनशैली में बदलाव, खानपान में असंतुलन और बढ़ता तनाव इसके मुख्य कारण माने जा रहे हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर दिनचर्या और आहार में सही सुधार किए जाएं, तो थायराइड को नियंत्रित रखना संभव है।

क्या है थायराइड?

गले के सामने स्थित एक छोटी सी ग्रंथि, जिसे थायरॉयड कहा जाता है, शरीर के मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करती है। यह T3 (ट्राईआयोडोथायरोनिन) और T4 (थायरोक्सिन) नामक हार्मोन बनाती है, जो ऊर्जा, पाचन, हृदय गति और शरीर के तापमान जैसी गतिविधियों को प्रभावित करते हैं। जब इन हार्मोन का संतुलन बिगड़ता है, तो दो स्थितियां उत्पन्न होती हैं — हाइपोथायरॉयडिज्म (हार्मोन की कमी) और हाइपरथायरॉयडिज्म (हार्मोन की अधिकता)।

लक्षणों को न करें नज़रअंदाज़

थकान, वजन बढ़ना या घटना, मूड स्विंग्स, बालों का झड़ना, अनियमित मासिक धर्म, और डिप्रेशन जैसे लक्षण थायराइड असंतुलन के संकेत हो सकते हैं। समय पर जांच और जागरूकता जरूरी है।

जीवनशैली में ये बदलाव ला सकते हैं राहत

1. संतुलित आहार:
थायराइड से पीड़ित लोगों को आयोडीन, सेलेनियम, विटामिन D और B12 युक्त भोजन लेना चाहिए। समुद्री नमक, दूध, दही, तिल, अखरोट और हरी सब्ज़ियां फायदेमंद हैं। वहीं, हाइपोथायरॉयड के मरीजों को गोभी, मूली और सोया उत्पादों से परहेज़ करना चाहिए।

ये भी पढ़ें: अब हारेगा कैंसर! बन गई वैक्सीन, 2025 से मिलेगा मुफ्त इलाज, पढ़ें पूरी खबर

2. नियमित योग और प्राणायाम:
सर्वांगासन, भुजंगासन और मत्स्यासन जैसे योगाभ्यास थायराइड ग्रंथि को उत्तेजित करने में सहायक होते हैं। उज्जायी और अनुलोम-विलोम प्राणायाम भी थायराइड बैलेंस में मदद करते हैं।

3. तनाव नियंत्रण:
थायराइड हार्मोन पर मानसिक तनाव का सीधा असर पड़ता है। ध्यान (मेडिटेशन), पर्याप्त नींद और तकनीक से दूरी बनाकर दिमाग को शांति दी जा सकती है।

4. स्क्रीन टाइम और नींद:
रात में देर तक मोबाइल या लैपटॉप पर समय बिताना हार्मोन बैलेंस को बिगाड़ सकता है। विशेषज्ञ रोज़ाना कम से कम 7 से 8 घंटे की नींद लेने की सलाह देते हैं।

हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ने के लिए यहां क्लिक करें 

5. नियमित जांच:
TSH, T3 और T4 टेस्ट के माध्यम से थायराइड की स्थिति का आंकलन किया जा सकता है। हर 6 महीने में जांच कराना लाभकारी हो सकता है।

आयुर्वेद की इलाज

आयुर्वेद में कांचनार गुग्गुल, अश्वगंधा और ब्राह्मी जैसी औषधियों को थायराइड संतुलन में प्रभावशाली माना गया है। हालांकि, किसी भी औषधि का सेवन चिकित्सकीय परामर्श से ही करना चाहिए।

ताजा अपडेट्स के लिए आप पञ्चदूत मोबाइल ऐप डाउनलोड कर सकते हैं, ऐप को इंस्टॉल करने के लिए यहां क्लिक करें.. इसके अलावा आप हमें फेसबुकट्विटरइंस्ट्राग्राम और यूट्यूब चैनल पर फॉलो कर सकते हैं।