RBI के गवर्नर शक्तिकांत दास ने शुक्रवार को मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की मीटिंग में लिए गए फैसलों की जानकारी देते हुए कहा, RBI गवर्नर ने बताया कि मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी के 6 में से 4 सदस्य ब्याज दरों में बदलाव के पक्ष में नहीं थे। बदलाव नहीं होने के कारण स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी यानी SDF रेट 6.25% पर बनी हुई है और मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी यानी MSF रेट और बैंक रेट 6.75% पर बरकरार है। यानी आपके मौजूदा लोन महंगे नहीं होंगे, न ही आपकी EMI बढ़ेगी।
इससे पहले, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने कोरोना के दौरान (27 मार्च 2020 से 9 अक्टूबर 2020) दो बार ब्याज दरों में 0.40% की कटौती की। इसके बाद अगली 10 मीटिंग्स में सेंट्रल बैंक ने 5 बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी की, चार बार कोई बदलाव नहीं किया और एक बार अगस्त 2022 में 0.50% की कटौती की। कोविड से पहले 6 फरवरी 2020 को रेपो रेट 5.15% पर था।
अभी सिर्फ महंगाई पर जोर
एमपीसी बैठक के बाद गवर्नर ने कहा कि आम आदमी को महंगाई से राहत दिलाना हमारी प्राथमिकता है, लेकिन देश की ग्रोथ रेट भी जरूरी है। लिहाजा एमपीसी ने अपने नजरिये को अब न्यूट्रल बना लिया है, जिसका मतलब है कि जैसा आगे माहौल होगा, उसी के हिसाब से रेपो रेट या फिर बैंकों के लोन रेट में कटौती की जाएगी। गवर्नर ने चिंता जताई कि तीसरी तिमाही में भी महंगाई से कोई राहत मिलती नहीं दिख रही और चौथी तिमाही से ही जाकर इसमें कुछ नरमी आएगी।
क्या-क्या हुआ मीटिंग में
- कमेटी ने सीआरआर यानी कैश रिजर्व रेश्यो को 4.50% से घटाकर 4% कर दिया है। बैंकों को अपनी जमा राशि का न्यूनतम प्रतिशत केंद्रीय बैंक के पास रिजर्व के रूप में रखना होता है। इसका इस्तेमाल केंद्रीय बैंक अर्थव्यवस्था में मनी सप्लाई को कंट्रोल करने के लिए करती है। इससे महंगाई को मैनेज करने और लिक्विडिडी को कंट्रोल करने में मदद मिलती है।
- कोलेटरल फ्री एग्रीकल्चरल लोन की सीमा को आखिरी बार 2019 में संशोधित किया गया था। एग्रीकल्चरल इनपुट कॉस्ट और ओवरऑल इन्फ्लेशन में बढ़ोतरी को ध्यान में रखते हुए लोन्स की सीमा 1.6 लाख रुपए प्रति उधारकर्ता से बढ़ाकर 2 लाख रुपए प्रति उधारकर्ता करने का फैसला लिया गया है।
- यूपीआई पर क्रेडिट लाइन सितंबर 2023 में शुरू की गई थी और इसे शेड्यूल्ड कॉमर्शियल बैंक्स के माध्यम से उपलब्ध कराया गया था। अब स्मॉल फाइनेंस बैंक को भी यूपीआई के माध्यम से क्रेडिट लाइन उपबल्ध कराने की मंजूरी दी गई है। इससे वित्तीय समावेशन और गहरा होगा।
- डिजिटल धोखाधड़ी को रोकने और कम करने के लिए रिज़र्व बैंक ने एक AI बेस्ड मॉडल mulehunter.ai डेवलप किया है।

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क्या होती है पॉलिसी रेट
किसी भी सेंट्रल बैंक के पास पॉलिसी रेट के रूप में महंगाई से लड़ने का एक शक्तिशाली टूल है। जब महंगाई बहुत ज्यादा होती है, तो सेंट्रल बैंक पॉलिसी रेट बढ़ाकर इकोनॉमी में मनी फ्लो को कम करने की कोशिश करता है।
पॉलिसी रेट ज्यादा होगी तो बैंकों को सेंट्रल बैंक से मिलने वाला कर्ज महंगा होगा। बदले में बैंक अपने ग्राहकों के लिए लोन महंगा कर देते हैं। इससे इकोनॉमी में मनी फ्लो कम होता है। मनी फ्लो कम होता है तो डिमांड में कमी आती है और महंगाई घट जाती है।
इसी तरह जब इकोनॉमी बुरे दौर से गुजरती है तो रिकवरी के लिए मनी फ्लो बढ़ाने की जरूरत पड़ती है। ऐसे में सेंट्रल बैंक पॉलिसी रेट कम कर देता है। इससे बैंकों को सेंट्रल बैंक से मिलने वाला कर्ज सस्ता हो जाता है और ग्राहकों को भी सस्ती दर पर लोन मिलता है।
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