ट्रंप का नया ट्रेड दांव! भारत-चीन समेत 16 देशों की जांच शुरू, क्या अमेरिकी राष्ट्रपति के पास इतनी ताकत है?

49

अमेरिका की राजनीति और वैश्विक व्यापार एक बार फिर चर्चा में हैं। राष्ट्रपति Donald Trump ने अपनी सख्त व्यापार नीति से दुनिया को फिर चौंका दिया है। हाल ही में कोर्ट से झटका मिलने के बावजूद ट्रंप प्रशासन पीछे हटने के मूड में नहीं दिख रहा। अब अमेरिका (Tariffs Us India) ने भारत, चीन और बांग्लादेश समेत 16 बड़े व्यापारिक साझेदार देशों के खिलाफ अनुचित व्यापार (Unfair Trade Practices) की जांच शुरू कर दी है।

ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या अमेरिका का राष्ट्रपति अकेले ही किसी भी देश के खिलाफ इतनी बड़ी कार्रवाई शुरू कर सकता है, या फिर अमेरिकी सिस्टम में उसे रोकने के लिए भी कोई मजबूत व्यवस्था मौजूद है।

क्या है ट्रंप का नया ट्रेड दांव?
जब से Donald Trump ने सत्ता संभाली, उन्होंने वैश्विक व्यापार को लेकर काफी आक्रामक रुख अपनाया। पहले कई देशों पर भारी टैरिफ लगाए गए और अब एक नई जांच शुरू कर दी गई है। इस जांच में India, China और Bangladesh जैसे देश शामिल हैं। अमेरिका यह पता लगाना चाहता है कि क्या ये देश अमेरिकी बाजार में सामान बेचते समय ऐसे तरीके अपना रहे हैं जिससे अमेरिकी कंपनियों को नुकसान हो रहा है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद नई रणनीति लाए ट्रंप
हाल ही में Supreme Court of the United States ने ट्रंप प्रशासन के कुछ टैरिफ को गैरकानूनी बताते हुए रद्द कर दिया था। इस फैसले को ट्रंप की ट्रेड पॉलिसी के लिए बड़ा झटका माना गया। लेकिन प्रशासन ने टैरिफ से पीछे हटने के बजाय नया रास्ता चुना। अब Section 301 of the Trade Act of 1974 के तहत इन देशों की व्यापार नीतियों की जांच की जा रही है। अगर जांच में कोई गड़बड़ी मिलती है, तो अमेरिका भविष्य में फिर से टैरिफ लगा सकता है।

ट्रंप के पास कौन-कौन से हैं अधिकार?
अमेरिका में राष्ट्रपति के पास विदेशी देशों से जुड़े मामलों में काफी अधिकार होते हैं। उदाहरण के तौर पर United States Trade Representative किसी भी देश की व्यापारिक गतिविधियों की जांच शुरू कर सकता है। इसके अलावा राष्ट्रपति International Emergency Economic Powers Act का इस्तेमाल करके किसी भी विदेशी खतरे को राष्ट्रीय आपातकाल घोषित कर सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो उस देश की संपत्ति फ्रीज करने या व्यापार पर रोक लगाने जैसे बड़े कदम भी उठाए जा सकते हैं।

सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों का इस्तेमाल
कई बार यह जांच सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं रहती। जरूरत पड़ने पर अमेरिकी प्रशासन United States Department of Justice, United States Department of State और United States Department of Defense जैसी एजेंसियों को भी शामिल कर सकता है। इसके अलावा Office of Foreign Assets Control के जरिए किसी देश या संगठन पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। हाल की जांचों में खास तौर पर चीन और यूरोप की इंडस्ट्रियल क्षमता को अमेरिका अपने घरेलू उद्योगों के लिए चुनौती मान रहा है।

क्या ट्रंप को रोकने का कोई तरीका नहीं?
अक्सर लोगों को लगता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो चाहे कर सकते हैं, लेकिन सच ऐसा नहीं है। अमेरिकी संविधान में “चेक एंड बैलेंस” की मजबूत व्यवस्था है। अगर राष्ट्रपति कोई ऐसा फैसला लेते हैं जो कानून के खिलाफ है, तो उसे अदालत में चुनौती दी जा सकती है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट द्वारा टैरिफ रद्द किया जाना इसका बड़ा उदाहरण माना जा रहा है।

अमेरिका की संसद यानी United States Congress के पास भी राष्ट्रपति की शक्तियों को सीमित करने के तरीके होते हैं। कांग्रेस के पास बजट पर नियंत्रण होता है। अगर किसी कार्रवाई के लिए बड़ी फंडिंग चाहिए, तो कांग्रेस उसे रोक सकती है। इसके अलावा नए कानून बनाकर राष्ट्रपति की कुछ कार्रवाइयों को सीमित भी किया जा सकता है।

अगर राष्ट्रपति अपनी शक्तियों का गलत इस्तेमाल करते हैं, तो उनके खिलाफ महाभियोग भी चलाया जा सकता है। यह अमेरिकी सिस्टम का सबसे कड़ा कदम होता है। इसके अलावा कई बार सरकारी एजेंसियां और अधिकारी भी नियमों का हवाला देकर किसी राजनीतिक कार्रवाई को धीमा कर सकते हैं।