संवाददाता भीलवाड़ा। जितने भी मंत्र है उसमें सबसे बड़ा मंत्र नवकार महामन्त्र है। इस मंत्र के जपने से आत्मा परमात्मा बन सकती है। मनुष्य के जीवन मे धर्म के पुरुषार्थ का उदय ही तब होता है जब उसे अर्थ कि व्यर्थता महसूस होती है। उक्त विचार तपाचार्य साध्वी जयमाला की सुशिष्या साध्वी डॉ चंद्रप्रभा ने महावीर भवन में आयोजित धर्मसभा मे व्यक्त किये l साध्वी ने कहा कि वही धन काम का है जो अंततः प्रायश्चित का मौका नही दे । हमारी आवश्यकता व कर्तव्यों की पूर्ति हो जावे इतना धन पर्याप्त है। साध्वी जयमाला, डॉ चंद्रप्रभा, आनदप्रभा, चंदनबाला, विनीतरूप प्रज्ञा , सुरभि ने सभी को मंगल आशीर्वाद प्रदान किया। हर रविवार कोआयोजित होने वाले नवकार महामन्त्र के जाप की 26 वी कड़ी में श्रावक – श्राविकाओं ने काफी संख्या में भाग लिया। जाप के पश्चात निकाले गए लक्की ड्रा के विजेता श्रीमती लहर कंवर कोठारी रही जिसे संघ द्वारा सम्मानित किया गया। रक्षाबंधन के पर्व पर महावीर भवन में साध्वी ने रक्षा सूत्र दिए जिसे बहिनो ने अपने भाइयों की कलाई पर बांधकर भाई के जीवन की मंगलकामना की। तपस्वी बहिन महिला मंडल की मंत्री श्रीमती सुधा राजेन्द्र रांका ने 6 उपवास के प्रत्याख्यान लिये। दोपहर में थाली सजावट प्रतियोगिता आयोजित की गई जिसमें प्रथम विधी जैन, द्वितीय अवधी जैन, तृतीय पलक जैन रही। बाहर से आये आगन्तुको का संघ अध्यक्ष चन्द्र सिंह चौधरी, मंत्री देवी लाल पीपाड़ा ने सभी आगन्तुको का स्वागत किया।
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