संवाददाता भीलवाड़ा। जीवन मे सुनना आसान है आत्मा में ग्रहण करना कठिन है, चरित्र आत्माओ का काम राह बताना,उपदेश देना, आत्म को जागृत करना है।एक सामायिक भी शुद्ध मन से की जावे तो जीवन का कल्याण हो जाता है। आत्मा अजर अमर है जब कि शरीर एक दिन धोखा देने वाला है। उक्त विचार तपाचार्य साध्वी जयमाला की सुशिष्या साध्वी आनन्दप्रभा ने महावीर भवन में आयोजित धर्मसभा में व्यक्त किये। साध्वी ने कहा कि धर्म के कार्य मे कभी प्रमाद मत करो। सद्गुणों को लेने के लिए अपने स्वयं के भीतर जो अवगुण है उनको समाप्त करे। जैसी संगत होती है , वैसी ही रंगत आती है, जैसा मित्र होता है , वैसा ही हमारा चरित्र होता है। गलत रास्ते पर चलने वाले व्यसनी और दुराचारी मित्रो का परित्याग करें और ऐसे लोगो के साथ रहे जिससे हमारा जीवन निर्मल व पवित्र बना रहे। साध्वी चंदनबाला ने सुखविपाक सूत्र का वाचन करते हुए कहा कि सुबाहु कुमार जब भगवान महावीर के पास जाते है तब भगवान उन्हें छोटे छोटे अणुव्रत समझाते है। जान बूझकर किसी को कष्ट नही देना, सदैव सत्य बोलना, ऐसा झूठ नही बोलना की अपने पर अगले का विश्वास खत्म हो जावे, चोरी नही करना, पति पत्नी के मध्य विश्वास कायम रखना आदि छोटे छोटे व्रत सुबाहु कुमार को समझाए। साध्वी ने कहा कि बुरी संगत के कारण काफी बच्चे युवा अवस्था मे गलत राह पकड़ लेते है, इसके जिम्मेदार माता – पिता है। रात्रि को देर से बच्चा घर आ रहा है तो उससे देर से आने का कारण पूछना चाहिए और उसे समय पर घर आने के लिए बाध्य करें। तपस्या के क्रम में महिला मंडल की मंत्री श्रीमती सुधा राजेन्द्र रांका ने 8 उपवास के प्रत्याख्यान लिए। बाहर से आये आगन्तुको का संघ के पदाधिकारियों ने शब्दो से स्वागत किया।
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