धानका समाज के समर्थन में अनाज मंडियों में एक दिन का कामकाज आज रहेगा बंद

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-55वें दिन भी जारी रहा धरना, जाति प्रमाण-पत्र जारी करने की मांग पर अडिग संघर्ष समिति
हनुमानगढ़। जिले में धानका / धाणका समाज के लोगों को अनुसूचित जनजाति (ST) का जाति प्रमाण-पत्र जारी नहीं किए जाने के विरोध में अब आंदोलन और तेज हो गया है। इसी क्रम में जिले की सभी अनाज मंडियों में एक दिन का कार्य पूरी तरह से बंद रखने का निर्णय लिया गया है। यह फैसला धानका/धाणका जनजाति संघर्ष समिति हनुमानगढ़ के नेतृत्व में लिया गया, जिसमें बड़ी संख्या में मजदूरों, किसानों और व्यापारिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि धानका समाज के लोग पीढ़ियों से कृषि उपज मंडियों में मजदूरी का कार्य कर रहे हैं। वे अनाज की सफाई, तुलाई और लदान जैसे कामों से अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। यह समाज परंपरागत रूप से मेहनतकश वर्ग है, जो वर्षों से इसी व्यवसाय पर निर्भर है। पहले तक इस समाज के लोगों को अनुसूचित जनजाति वर्ग में मान्यता प्राप्त थी और जाति प्रमाण-पत्र जारी किए जाते थे।
समिति ने बताया कि “धानका” और धाणका” एक ही उच्चारण और एक ही जाति वर्ग से संबंधित हैं, इनमें कोई भेद नहीं है। पूर्व में इसी तरह का विवाद “मीणा” और “मीना” समाज में भी हुआ था, जिसे सरकार ने दोनों को समान मानते हुए सुलझाया था। उसी प्रकार धानका समाज के लिए भी समान निर्णय लागू किया जाना चाहिए।
धरना स्थल पर मौजूद संघर्ष समिति के सदस्यों ने बताया कि जिला कलेक्ट्रेट के बाहर 55वें दिन भी शांतिपूर्ण धरना जारी है, लेकिन अब तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इस उपेक्षा से समाज के लोगों में गहरा आक्रोश है। समिति ने प्रशासन से मांग की है कि जाति प्रमाण-पत्र जारी करने पर लगी मौखिक रोक को तत्काल निरस्त किया जाए और पूर्ववत् प्रमाण-पत्र जारी करने की प्रक्रिया पुनः प्रारंभ की जाए।
समाज के नेताओं ने कहा कि यदि प्रशासन ने जल्द ही उचित निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन को व्यापक रूप देने के लिए जिलेभर की मंडियों में चरणबद्ध तरीके से कामबंदी की जाएगी। संघर्ष समिति ने सभी संबंधित विभागों से इस सामाजिक और मानवीय मुद्दे पर संवेदनशीलता दिखाने की अपील की है।

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