निगम स्तरीय खेल प्रतियोगिता में अवरोध, अधिशासी अभियंता पर गंभीर आरोप

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– गणतंत्र दिवस आयोजन के दौरान विकेट उखाड़ने, अभद्र भाषा व धमकियों से कर्मचारियों में आक्रोश
हनुमानगढ़। राजस्थान राज्य विद्युत प्रसारण निगम लिमिटेड द्वारा गणतंत्र दिवस 2026 के उपलक्ष्य में आयोजित निगम स्तरीय खेल प्रतियोगिताओं के दौरान अनुशासनहीनता का गंभीर मामला सामने आया है। राजस्थान विद्युत प्रसारण मजदूर कांग्रेस (इंटक) ने अधिशासी अभियंता श्री वीरेन्द्र सिंह बेनीवाल, 220 के.वी. जी.एस.एस. हनुमानगढ़ पर खेल प्रतियोगिताओं में जानबूझकर व्यवधान उत्पन्न करने, अभद्र व्यवहार करने तथा तानाशाही रवैया अपनाने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
इंटक संगठन द्वारा संभागीय मुख्य अभियंता (टी. एंड सी.) जोधपुर को भेजे गए ज्ञापन में बताया गया कि दिनांक 23 जनवरी 2026 को क्रिकेट मैच प्रारंभ होते समय अधिशासी अभियंता श्री बेनीवाल द्वारा क्रिकेट पिच से विकेट उखाड़कर अपने निजी वाहन में डालकर ले जाया गया। यह कृत्य एक बार नहीं बल्कि जानबूझकर दो बार किया गया, जिसकी संपूर्ण वीडियोग्राफी उपलब्ध होने का दावा किया गया है। घटना के समय अधीक्षण अभियंता श्री कन्हैयालाल डांगी भी मौके पर मौजूद थे, किंतु उन्होंने मूकदर्शक बने रहकर किसी प्रकार की रोकथाम नहीं की।
ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि उक्त घटनाक्रम के दौरान अधिशासी अभियंता द्वारा कर्मचारियों से अभद्र भाषा में बात की गई तथा खुलेआम धमकियां दी गईं। उन्होंने कथित रूप से कहा कि क्रिकेट पिच को जेसीबी से उखाड़ दिया जाएगा। इसके साथ ही खेल प्रतियोगिताओं में भाग ले रहे अपने अधीनस्थ कर्मचारियों का आकस्मिक अवकाश भी एकतरफा रूप से लगा दिया गया, जो निगम नियमों का खुला उल्लंघन बताया गया है।
इंटक संगठन के अनुसार “स्पोर्ट्स टूर्नामेंट 2026” व्हाट्सएप ग्रुप में भी अधिशासी अभियंता द्वारा आपत्तिजनक व धमकी भरे संदेश डाले गए, जिससे कर्मचारियों में भय व अराजकता का माहौल उत्पन्न हो गया। संगठन ने इसे निगम की छवि धूमिल करने वाला कृत्य बताया है।
इंटक ने निगम प्रशासन पर दोहरे मापदंड अपनाने का भी आरोप लगाया है। संगठन का कहना है कि यदि ऐसा कृत्य किसी छोटे कर्मचारी द्वारा किया जाता तो उस पर तत्काल निलंबन जैसी कठोर कार्रवाई होती, जबकि उच्च अधिकारी के मामले में लीपापोती की जा रही है।
संगठन ने मांग की है कि अधिशासी अभियंता श्री वीरेन्द्र सिंह बेनीवाल के विरुद्ध निगम नियमों व राज्य सरकार के आदेशों के अनुसार कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि 7 दिवस के भीतर कोई कार्रवाई नहीं होती है तो इंटक संगठन को गांधीवादी तरीके से धरना या आंदोलन करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी निगम प्रशासन की होगी।

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