संवाददाता भीलवाड़ा। भगवान महावीर में 14 पूर्व का ज्ञान था। वर्तमान में शंका का समाधान करने वाले आचार्य, उपाध्याय, साधु- साध्वी है जो हमारी जिज्ञासा और शंकाओं का समाधान करते है, और हमे सही मार्गदर्शन पर चलने की प्रेरणा देते है। तपस्या एक आत्मदर्शन है, इस पर आडम्बर नही होना चाहिए। पर्युषण पर्व प्रदूषण को मिटाने, मन की दरारों को समाप्त करने का पर्व है। वंदन करने से व्यक्ति अपने कर्मो की निर्जरा कर लेता है। अंहकार को समाप्त करने का एक ही माध्यम है वंदन अपनी सोच को सदैव सकारात्मक रखो, गुरु की आज्ञा में ही धर्म है। उक्त विचार तपाचार्य जयमाला की सुशिष्या साध्वी आनंद प्रभा ने धर्मसभा में व्यक्त किये साध्वी चंदनबाला ने कहा कि जैन सूत्र व आगम सदैव जोड़ने का काम करते है। अर्जुन माली ने 6 महीनों में जितने कर्म बांधे थे उन कर्मो को वापिस दीक्षा लेकर 6 महीनों के भीतर काट लिये। हमने साल भर के भीतर जो भी पाप कर्म किये है उस पर चिंतन, मनन करे और उन कर्मो को त्याग, तपस्या, संयम, विवेक रख कर काटे ताकि कर्मो की निर्जरा हो सके।
साध्वी विनीतरूप प्रज्ञा ने अन्तर्गढ़ दशांग सूत्र का वाचन करते हुए कहा कि हमारे मन मे सरलता और उदारता रखे , सरलता के अभाव के कारण ही आत्मा का कल्याण नही हो पा रहा है। परिवार में बचपन से ही बच्चों में अच्छे संस्कार डाले, जो बच्चा बचपन मे देखता है सीखता है वही आगे चलकर राह पकड़ लेता है। हमे सदैव क्रोध पर संयम रखना है यह क्रोध ही व्यक्ति को अपराध की और ले जाता है।
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