-आदिवासी रूप धरकर जताया विरोध, जाति प्रमाण पत्र नहीं मिलने से शिक्षा व रोजगार पर संकट
हनुमानगढ़। धानका/धाणका जनजाति संघर्ष समिति हनुमानगढ़ के बैनर तले जिला कलक्ट्रेट के समक्ष चल रहा अनिश्चितकालीन धरना रविवार को 14वें दिन भी जारी रहा। समाज के लोगों ने इस बार अनूठे अंदाज में विरोध दर्ज कराया। समिति के सदस्यों ने महान आदिवासी नेता बिरसा मुंडा की तरह अपने ऊपर पेड़-पौधों की पत्तियां सजाकर आदिवासी रूप धारण किया और सरकार व प्रशासन के खिलाफ रोष प्रकट किया। धरने पर बैठे लोगों ने कहा कि आज आधुनिक भारत में भी धानका समाज को वास्तविक आजादी नहीं मिल पाई है। समाज के युवाओं के पास हुनर और योग्यता होने के बावजूद, जाति प्रमाण पत्र के अभाव में वे प्रतियोगी परीक्षाओं में चयनित होकर भी नौकरियों से वंचित रह जाते हैं। कई बार चार से पांच बार तक परीक्षा पास करने के बाद भी अंतिम चयन जाति प्रमाण पत्र न मिलने की वजह से अटक जाता है। ऐसे हालात में भविष्य में समाज का युवा दोबारा से आदिवासी जीवन जीने को मजबूर होगा।
समिति के नेताओं ने बताया कि सरकार की मौखिक रोक की वजह से धानका समाज को अनुसूचित जनजाति का जाति प्रमाण पत्र जारी नहीं किया जा रहा है। जबकि 18 सितंबर 1976 की गजट अधिसूचना में धानका को अनुसूचित जनजाति में शामिल किया गया था। दुर्भाग्य से उस अधिसूचना में हिंदी अनुवाद में त्रुटि कर ‘धानका’ की जगह ‘धाणका’ लिख दिया गया। इसी त्रुटि का खामियाजा आज पूरा समाज भुगत रहा है। संघर्ष समिति के सदस्यों का कहना है कि धाणका जाति को अनुसूचित जनजाति में शामिल किए जाने के बावजूद प्रशासन जाति प्रमाण पत्र जारी करने से इंकार करता है। इस कारण समाज के लोग शैक्षणिक, आर्थिक और सामाजिक योजनाओं से वंचित हो रहे हैं। विशेष रूप से छात्रों और नौकरी के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों को इस समस्या का सीधा नुकसान झेलना पड़ रहा है।
धरने पर मौजूद युवाओं ने कहा कि उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। यदि समाज के युवाओं को समय रहते जाति प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं करवाया गया, तो वे उच्च शिक्षा, छात्रवृत्ति, प्रतियोगी परीक्षाओं और सरकारी नौकरियों से पूरी तरह से वंचित हो जाएंगे। वहीं बुजुर्गों ने चेतावनी दी कि यदि समस्या का समाधान शीघ्र नहीं किया गया तो आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा। समिति ने राज्य सरकार से मांग की है कि 1976 की गजट अधिसूचना में हुई त्रुटि को तुरंत सुधार कर धानका समाज को उसका हक दिलाया जाए। साथ ही जिला प्रशासन को निर्देश दिए जाएं कि समाज के युवाओं और लोगों को अनुसूचित जनजाति का जाति प्रमाण पत्र बिना किसी बाधा के उपलब्ध करवाया जाए।
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