– नालियां, सड़क, पुलिया, मनरेगा व आवास योजना की समस्याओं के समाधान की मांग
हनुमानगढ़। गांव 2 केएनजे के ग्रामीणों ने मूलभूत सुविधाओं की कमी को लेकर शुक्रवार को कलेक्ट्रेट तक नंगे पांव पदयात्रा निकालकर जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। पदयात्रा गांव की आबादी क्षेत्र से शुरू होकर कलेक्ट्रेट पहुंची, जिसमें सैकड़ों ग्रामीणों ने भाग लिया। इस पदयात्रा का नेतृत्व रणवीर सिहाग ने किया।
ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर के नाम दिए ज्ञापन में बताया कि गांव 2 केएनजे को नगर परिषद की सीमा में शामिल किए जाने के बावजूद आज तक यहां मूलभूत सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। गांव की अधिकांश गलियां और आम रास्ते अभी भी कच्चे हैं तथा पुरानी बनी सड़कों की हालत बेहद खराब हो चुकी है। जगह-जगह गड्ढे होने और सड़कें टूटने के कारण बरसात के समय इनमें पानी भर जाता है, जिससे आमजन और स्कूल जाने वाले विद्यार्थियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
ग्रामीणों ने बताया कि गांव के दो-तीन मुख्य रास्तों पर बनी पुलिया भी जर्जर हो चुकी हैं। कई स्थानों पर पुलिया टूटने के कारण वाहनों के फंसने की घटनाएं होती रहती हैं और दुर्घटना का खतरा बना रहता है। इसके अलावा गांव में नालियों की व्यवस्था नहीं होने के कारण बरसात और घरों का गंदा पानी सड़कों पर ही फैल जाता है, जिससे गंदगी बढ़ती जा रही है और लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
ज्ञापन में यह भी बताया गया कि सरकार द्वारा करीब 60 लाख रुपये की लागत से गांव में पंचायत भवन का निर्माण करवाया गया था, लेकिन वह आज तक बंद पड़ा है। भवन में कोई अधिकारी या कर्मचारी नहीं बैठता, जिससे ग्रामीणों को मूल निवास, जाति प्रमाण पत्र और जन्म प्रमाण पत्र जैसे जरूरी दस्तावेज बनवाने के लिए नगर परिषद के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि जब गांव पंचायत था, तब पंचायत द्वारा ग्रामीणों को निशुल्क पट्टे दिए गए थे, लेकिन नगर परिषद में शामिल होने के बाद उन पट्टों को अपने कब्जे में ले लिया गया और अब तक ग्रामीणों को पट्टे वितरित नहीं किए गए हैं।
इसके साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान निर्माण के लिए कई लोगों ने आवेदन किए थे, जिनमें से कुछ लाभार्थियों को पहली किश्त तो मिल गई, लेकिन बाद की किश्तें जारी नहीं होने से उनके मकान अधूरे ही रह गए। मजबूरी में कई लोगों को अपने निजी खर्च से निर्माण कार्य पूरा करना पड़ा।
ग्रामीणों ने बताया कि मनरेगा के कार्य भी बंद पड़े हैं, जिसके कारण कई मजदूरों को रोजगार के लिए दूसरे स्थानों पर दिहाड़ी करने के लिए पलायन करना पड़ रहा है। गांव में स्थित जोहड़ पायतन में पहले दो बोरवेल लगाए गए थे, लेकिन वर्तमान में दोनों बोरवेल बंद पड़े हैं, जिससे पानी की समस्या भी बनी हुई है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की कि गांव की इन समस्याओं का शीघ्र समाधान करवाया जाए और संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश दिए जाएं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं किया गया तो ग्रामीणों को आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
इस दौरान विकास शर्मा, रणवीर सिहाग, राजेन्द्र सुथार, उत्तम नेहरा, मुकेश कुमार, सुखप्रीत सिंह, जसु सिंह, हरदीप सिंह, महेन, राजेन्द्र झाझरिया तथा अन्य ग्रामीण मौजूद रहे।
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