साल 2015 में केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना की शुरुआत की थी, जिसे Skill India के नाम से जाना जाता है। इस योजना का उद्देश्य देश के युवाओं को रोजगार के लिए प्रशिक्षित करना था। योजना के तहत 2015 से 2022 के बीच करीब 14,000 करोड़ रुपये खर्च किए गए और लक्ष्य 1 करोड़ 30 लाख युवाओं को प्रशिक्षण देने का रखा गया।
हाल ही में संसद में पेश की गई CAG की ऑडिट रिपोर्ट में इस योजना से जुड़ी गंभीर गड़बड़ियों का खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, योजना के तहत करीब 95 लाख युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया, जिनके खातों में 500 रुपये की प्रोत्साहन राशि सीधे भेजी जानी थी। लेकिन जांच में सामने आया कि 95 लाख में से करीब 90 लाख लाभार्थियों के बैंक अकाउंट नंबर दर्ज ही नहीं थे।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि कई फॉर्म्स में 1111 और 123456789 जैसे फर्जी अकाउंट नंबर भरे गए थे। वहीं, 10 लाख से ज्यादा उम्मीदवारों के फोन नंबर और ई-मेल आईडी एक जैसी पाई गईं। ऑडिट के दौरान यह भी सामने आया कि कुछ ट्रेनिंग कंपनियों ने एक ही फोटो को अलग-अलग राज्यों और बैचों की ट्रेनिंग दिखाने के लिए इस्तेमाल किया।

CAG की यह रिपोर्ट योजना के क्रियान्वयन और निगरानी प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। अब बड़ा सवाल यह है कि इतने बड़े पैमाने पर खर्च हुई राशि की जवाबदेही तय कब होगी।
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