बंगाल में ‘खेला’ खत्म? मोदी की झालमुड़ी से ज्यादा बंसल-यादव की रणनीति ने खिलाया कमल!

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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 (west Bengal) के रुझानों में बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। लंबे समय से राज्य की सत्ता पर काबिज ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) इस बार पिछड़ती नजर आ रही है, जबकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) ऐतिहासिक जीत की ओर बढ़ती दिख रही है।

ताजा रुझानों के मुताबिक, 294 सीटों वाली विधानसभा में बहुमत के आंकड़े 147 को पार करते हुए BJP 170 से ज्यादा सीटों पर आगे चल रही है। वहीं, ममता बनर्जी की पार्टी TMC करीब 80 सीटों तक सिमटती नजर आ रही है। चुनाव आयोग के शुरुआती आंकड़ों में भी BJP करीब 171 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, जबकि TMC 83 सीटों पर आगे है।

ममता बनर्जी ने इससे पहले कई बार एग्जिट पोल को गलत साबित किया है, खासकर 2021 के चुनाव में, लेकिन इस बार के रुझान अलग तस्वीर दिखा रहे हैं। अगर यही नतीजे कायम रहते हैं, तो यह बंगाल की राजनीति में एक बड़ा बदलाव माना जाएगा और BJP के लिए ऐतिहासिक जीत साबित होगी।

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गौरतलब है कि TMC पिछले 15 सालों से बंगाल की सत्ता में बनी हुई है। ऐसे में यह चुनाव सिर्फ सत्ता परिवर्तन ही नहीं, बल्कि राज्य की राजनीति में बड़े वैचारिक बदलाव का संकेत भी माना जा रहा है। वहीं, दक्षिण 24 परगना जिले की फल्टा सीट पर 21 मई को पुनर्मतदान होगा और उसके वोटों की गिनती 24 मई को की जाएगी। फिलहाल पूरे देश की नजर बंगाल के इन नतीजों पर टिकी हुई है, जो राज्य की राजनीति की दिशा तय कर सकते हैं। चलिए जानते हैं.. इस बार हार के अंतर को खत्म करने के लिए बीजेपी ने क्या खास रणनीति बनाई?

TMC के गढ़ में अमित शाह ने कैसे लगाई सेंध
बीजेपी ने ‘परिवर्तन यात्रा’ के जरिए तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ बड़ा माहौल तैयार किया। यह सिर्फ एक अभियान नहीं, बल्कि एंटी-इनकंबेंसी को हवा देने की रणनीति भी थी। पार्टी ने भ्रष्टाचार, घुसपैठ और खराब शासन जैसे मुद्दों को जोर-शोर से उठाया और बदलाव की मांग को जनता तक पहुंचाया। करीब 5,000 किलोमीटर लंबी यह यात्रा राज्य के हर कोने तक पहुंची। इस पूरे अभियान की कमान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के हाथ में रही, जिन्होंने वॉर रूम से लेकर ग्राउंड फीडबैक तक हर चीज पर खुद नजर रखी।

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बंसल-यादव की जोड़ी ने किया कमाल
बीजेपी की इस बढ़त में संगठन के दो अहम चेहरे भी सामने आए—सुनील बंसल और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव। दोनों को खास तौर पर बंगाल में संगठन मजबूत करने की जिम्मेदारी दी गई थी। इन्होंने मंडल और बूथ स्तर तक जाकर रणनीति बनाई, कार्यकर्ताओं के बीच तालमेल बढ़ाया और अंदरूनी मतभेदों को सुलझाया। जमीन पर मजबूत नेटवर्क खड़ा करने और वोटरों तक पहुंच बनाने में इस जोड़ी की भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है।

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झालमुड़ी से हुगली तक: मोदी का ‘ग्राउंड कनेक्ट’ बना चुनावी हथियार
बंगाल में पकड़ मजबूत करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आक्रामक प्रचार किया। उन्होंने 21 रैलियां और तीन रोड शो कर सीधे जनता तक पहुंच बनाई। टीएमसी के ‘बंगाल अस्मिता’ नैरेटिव के बीच मोदी ने लोकल कनेक्ट पर खास फोकस किया—कभी झालमुड़ी खाते नजर आए, तो कभी हुगली नदी में बोटिंग करते दिखे। इसके साथ ही उन्होंने कोलकाता के प्रमुख धार्मिक स्थलों जैसे थंथानिया कालीबाड़ी, मतुआ ठाकुरबाड़ी, दक्षिणेश्वर काली मंदिर और बेलूर मठ में जाकर आस्था का संदेश भी दिया।

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