अहमदाबाद में 12 जून को (Ahmedabad plane crash) हुए एअर इंडिया विमान हादसे की जांच अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गई है, जिसने पूरे एविएशन सेक्टर को चौंका दिया है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, हादसे से पहले पायलटों के बीच हुई बातचीत में यह साफ हुआ है कि विमान के कैप्टन सुमीत सभरवाल ने खुद इंजनों की फ्यूल सप्लाई ‘कट ऑफ’ कर दी थी। यह खुलासा कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर की रिकॉर्डिंग से हुआ है, जिसे अब अमेरिकी जांच एजेंसियों ने अपने विश्लेषण में शामिल किया है।
रिपोर्ट के अनुसार, विमान के को-पायलट क्लाइव कुंदर ने कैप्टन से हैरानी में पूछा “आपने फ्यूल स्विच को कट ऑफ पोज़िशन में क्यों कर दिया?” यह सवाल उड़ान के दौरान किया गया, जब विमान को हवा में स्थिर होना था, लेकिन अचानक दोनों इंजनों ने काम करना बंद कर दिया। रिकॉर्डिंग में यह भी सामने आया कि को-पायलट की आवाज में घबराहट थी, जबकि कैप्टन सभरवाल पूरी तरह शांत थे।
कैप्टन सभरवाल एअर इंडिया के अनुभवी पायलट थे, जिनके पास 15,638 घंटे का उड़ान अनुभव था, जबकि को-पायलट कुंदर ने अब तक 3,403 घंटे की उड़ानें भरी थीं। बावजूद इसके, इस स्तर की संभावित चूक या जानबूझी कार्रवाई से अब कई गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
इस हादसे में 241 यात्रियों और 19 स्थानीय लोगों की मौत हो गई थी। विमान एक आवासीय कॉलेज भवन पर गिरा था, जिससे दर्जनों लोग मलबे में दब गए थे। हादसे के बाद तुरंत बोइंग कंपनी और DGCA ने तकनीकी गड़बड़ी की संभावना से इनकार किया था, लेकिन अब कॉकपिट से मिले इनपुट के बाद यह स्पष्ट होता जा रहा है कि वजह तकनीकी नहीं, बल्कि मानवीय हो सकती है।
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अमेरिका ने भारतीय पायलट को बताया दोषी
अभी तक भारत के विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB), DGCA और एयर इंडिया की ओर से इस नए खुलासे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन अमेरिकी अधिकारी अब इस हादसे को एक संभावित “पायलट-जनित” त्रासदी के रूप में देख रहे हैं।
अमेरिका क्यों बना रहा है भारत पर दवाब
इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद चर्चा तेज है कि अमेरिका अपनी कंपनी को बचाने के लिए भारत पर दवाब बना रही है। दरअसल, एअर इंडिया का यह विमान Boeing 737 MAX था, जिसे अमेरिका की कंपनी बोइंग बनाती है। ICAO (अंतरराष्ट्रीय नागर विमानन संगठन) के नियमों के अनुसार, किसी भी हादसे में निर्माता देश को जांच में शामिल किया जाता है। इसलिए अमेरिकी NTSB (National Transportation Safety Board) को कानूनी रूप से जांच में भाग लेने और डेटा एक्सेस करने का अधिकार है।
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इसके अलावा, भारत के पास अभी भी अत्याधुनिक ब्लैक बॉक्स डिकोडिंग लैब पूरी तरह सक्रिय नहीं है। इसलिए ज्यादातर ब्लैक बॉक्स (CVR और FDR) जांच के लिए फ्रांस या अमेरिका भेजे जाते हैं। इस मामले में भी संभावना है कि रिकॉर्डिंग अमेरिका में डिकोड की गई हो और वहीं से किसी सूत्र ने Wall Street Journal को जानकारी लीक कर दी हो।
अमेरिका बोइंग को क्यों बचा रहा है?
इस गंभीर आरोप के बाद से चर्चा तेज है कि क्या अमेरिका बोइंग को बचा रहा है। दरअसल विमान बनाने वाली कंपनी बोइंग अमेरिकी है। 2024 से अब तक बोइंग कंपनी गंभीर सुरक्षा विवादों और फाइनेंशियल नुकसान से जूझ रही है। अमेरिकी सीनेट में बोइंग के व्हीसलब्लोअर्स ने आरोप लगाए थे कि कंपनी सुरक्षा के साथ समझौता कर रही है। FAA (अमेरिकी एविएशन रेगुलेटर) ने भी बोइंग के विमान निर्माण पर सवाल उठाए थे। ऐसे में अगर भारत में हुआ यह हादसा तकनीकी खामी से जुड़ जाता, तो बोइंग को बड़ा वैश्विक नुकसान होता। इसलिए अमेरिका अपनी कंपनी को बचाने के लिए पायलट पर आरोप मढ़ रहा है।
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अगर यह पुष्टि होती है कि क्रैश तकनीकी नहीं बल्कि मानवीय भूल या जानबूझा फैसला था, तो यह भारतीय उड्डयन इतिहास की सबसे गंभीर लापरवाहियों में शामिल हो जाएगा। इससे कॉकपिट में सिर्फ वॉयस नहीं, वीडियो रिकॉर्डिंग को भी अनिवार्य किए जाने की मांग तेज हो सकती है।
फिलहाल सबकी नजर AAIB की आधिकारिक रिपोर्ट पर टिकी है, जो तय करेगी कि क्या यह एक लापरवाही थी या कुछ और। लेकिन इतना तय है कि अब जांच का फोकस तकनीकी फेल्योर से हटकर उस सीनियर पायलट पर आ गया है, जो उस विमान को उड़ा रहा था।
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