रावण ने विभीषण को दरबार में लात मारकर लंका से निकाला, प्रभु श्रीराम की शरण में पहुंचे विभीषण

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श्रीरामलीला महोत्सव के ग्यारहवें दिन संतोषी माता की झांकी ने मोहा मन, 20 अक्टूबर को होगा भव्य दशहरा उत्सव
हनुमानगढ़। टाउन के श्रीरामलीला रंगमंच पर श्रीरामलीला समिति की ओर से आयोजित भव्य श्रीरामलीला महोत्सव के ग्यारहवें दिन श्रद्धा, भक्ति और रोमांच से भरपूर प्रसंगों का मंचन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत संतोषी माता की मनमोहक झांकी के प्रदर्शन से हुई। एपेक्स क्लब के पदाधिकारियों ने विधिवत पूजा-अर्चना कर आरती की। इसके बाद रावण के दरबार में विभीषण के अपमान और लंका से निष्कासन तथा विभीषण के प्रभु श्रीराम की शरण में पहुंचने के प्रसंग का मंचन किया गया। कलाकारों की प्रभावशाली प्रस्तुति ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। मंचन के दौरान दिखाया गया कि रावण के दरबार में विभीषण उसे माता सीता को सम्मानपूर्वक प्रभु श्रीराम को लौटाने और अधर्म का मार्ग छोड़ने की सलाह देते हैं। लेकिन अहंकार में डूबा रावण अपने छोटे भाई की उचित सलाह को स्वीकार करने के बजाय क्रोधित हो उठता है। वह भरे दरबार में विभीषण को लात मारकर लंका से बाहर निकाल देता है। रावण के इस व्यवहार के बाद विभीषण प्रभु श्रीराम की शरण में पहुंचते हैं। यह प्रसंग दर्शाता है कि अहंकार और अधर्म का मार्ग अंततः विनाश की ओर ले जाता है, जबकि सत्य और धर्म का साथ देने वाला व्यक्ति सम्मान प्राप्त करता है। समिति सचिव दिनेश तलवाड़िया ने बताया कि वर्ष 1965 से अशोक वाटिका के मंचन में इस्तेमाल होने वाले फल लगातार समिति कोषाध्यक्ष सतीश गर्ग के परिवार की ओर से उपलब्ध करवाए जा रहे हैं।

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