मोह उत्पन्न होने पर व्यक्ति होता है विषादग्रस्तः स्वामी श्री कमलानंद गिरि जी महाराज

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हनुमानगढ़। श्री शिवशक्ति मंदिर श्री कल्याण धाम आश्रम हनुमानगढ़ में सात दिवसीय गीता ज्ञान गंगा कथा के पांचवें दिन प्रवचनों की अमृतवर्षा करते हुए देवभूमि हरिद्वार के अनंत श्री विभूषित 1008 महामंडलेश्वर स्वामी श्री कमलानंद गिरि जी महाराज ने गीता पर चर्चा करते हुए कहा कि व्यक्ति के मन में जब मोह जागता है तो व्यक्ति अर्जुन की तरह विषादग्रस्त हो जाता है। फिर उसमें तनाव पैदा हो जाता है। मोह से विषाद और विषाद से दुःख पैदा होता है। सारी जिंदगी अशांत हो जाती है और परेशानी में बीतती है।
महाराज जी ने कहा कि अर्जुन भी मोह से ग्रसित हो गया। युद्ध से पहले ही उसने देखा कि जो कौरव पक्ष में खड़े हैं वह सभी नाते-रिश्तेदार हैं। आचार्य, पितामह, चाचा, मामा, भाई, मित्र सब अपने ही तो हैं। अर्जुन के अंदर से आवाज आती है अरे अर्जुन, तू अपने लोगों को मारने के लिए खड़ा हो गया। क्षुद्र भूमि और राज्य प्राप्त करने के लिए अपने ही सगे-संबंधियों को मारना चाहता है। अपने नाते-रिश्तेदारों को देखते ही अर्जुन के मन में मोह हो गया और अर्जुन कहने लगा केशव अपने स्वजनों को देखकर मेरे हृदय में धड़कन बढ़ गई है। मेरे शरीर में जलन पैदा हो रही है। मेरा रोम-रोम खड़ा हो गया। मैं युद्ध नहीं करना चाहता। मगर भगवान के मुख से गीता उपदेश सुनने के बाद अर्जुन युद्ध के लिए तैयार होता है।

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