टारगेटेड केसों के निस्तारण की कार्ययोजना के विरोध में बार संघ हनुमानगढ़ का न्यायिक कार्य बहिष्कार

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– अधिवक्ताओं ने कहा पांच वर्ष से कम पुराने प्रकरणों को योजना में शामिल करना न्याय की गुणवत्ता के विपरीत, आदेश वापस नहीं हुआ तो पूरे राजस्थान में आंदोलन की चेतावनी

हनुमानगढ़। राजस्थान उच्च न्यायालय, जोधपुर द्वारा अधीनस्थ न्यायालयों में लंबित टारगेटेड केसों के निस्तारण के लिए जारी कार्ययोजना के विरोध में सोमवार को बार संघ हनुमानगढ़ के अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्यों का बहिष्कार किया। बार संघ अध्यक्ष रोहित सिंह खींची एडवोकेट एवं सचिव हेमराज वधवा ने बताया कि राजस्थान उच्च न्यायालय, जोधपुर द्वारा जारी पत्रांक GEN/XV/55/2024/1809 के तहत Targeted Cases के निस्तारण की कार्ययोजना के फेज-VI के अंतर्गत अधीनस्थ न्यायालयों में प्रकरणों के निस्तारण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके विरोध में बार संघ हनुमानगढ़ के समस्त अधिवक्ताओं ने 31 अगस्त को न्यायिक कार्यों में भाग नहीं लिया।
अधिवक्ताओं का कहना है कि लंबित प्रकरणों के त्वरित निस्तारण के लिए शुरू की गई कार्ययोजना का मूल उद्देश्य 20 वर्ष या उससे अधिक पुराने मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित करना था। लेकिन वर्तमान में पांच वर्ष से कम पुराने प्रकरणों को भी टारगेटेड केसों में शामिल किया जा रहा है। इससे अधीनस्थ न्यायालयों में प्रकरणों की न्यायिक गुणवत्ता के बजाय संख्यात्मक निस्तारण पर अधिक जोर दिया जा रहा है।
बार संघ अध्यक्ष रोहित सिंह खींची एडवोकेट ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया में प्रत्येक मामले की प्रकृति, परिस्थितियों, साक्ष्यों और कानूनी पहलुओं का समुचित परीक्षण आवश्यक है। केवल निर्धारित संख्या में मामलों का निस्तारण करने की प्रतिस्पर्धात्मक कार्यशैली से न्याय व्यवस्था के आधारभूत मानदंड प्रभावित होने की आशंका है। अधिवक्ताओं का आरोप है कि इस प्रकार की कार्यप्रणाली से न्याय की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।

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