प्राकृतिक चिकित्सा की वैधानिक स्थिति पर हुई विस्तृत चर्चा

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हनुमानगढ़। इंडियन मेडिसिन बोर्ड राजस्थान के रजिस्ट्रार डॉ. सीताराम शर्मा से जयपुर स्थित उनके कार्यालय में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, अखिल भारतीय प्राकृतिक चिकित्सा परिषद दिल्ली एवं आरोग्य विहार प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र मानसरोवर जयपुर के डॉ. शिव कुमार शर्मा, डॉ. इस्माइल टॉक तथा जैन विश्व भारती लाडनूं स्थित महाप्रज्ञायोग प्राकृतिक चिकित्सा मेडिकल कॉलेज के योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा विभागाध्यक्ष डॉ. विजय शर्मा ने शिष्टाचार भेंट की। चिकित्सकों ने डॉ. शर्मा को गुलदस्ता भेंट कर सम्मानित किया। इस दौरान प्राकृतिक चिकित्सा की वैधानिक स्थिति, चिकित्सकों के पंजीकरण तथा डिग्री-डिप्लोमा धारियों से जुड़े विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। डॉ. शिवकुमार शर्मा ने बताया कि इंडियन मेडिसिन बोर्ड राजस्थान अधिनियम 1953 में वर्ष 2015 में संशोधन कर योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा को शामिल किया गया था। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर गठित समितियों में प्राकृतिक चिकित्सा के डिग्री एवं डिप्लोमा धारियों के पंजीकरण का प्रावधान किए जाने पर विचार किया गया था। चिकित्सकों ने बताया कि तत्कालीन आयुर्वेद मंत्री की अध्यक्षता में शासन सचिव आयुर्वेद एवं इंडियन मेडिसिन बोर्ड के रजिस्ट्रार की बैठक में योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा के डिग्री धारियों का ए श्रेणी तथा डिप्लोमा धारियों का बी श्रेणी में पंजीकरण करने की अनुशंसा की गई थी। इसके बाद राजस्थान विधानसभा ने वर्ष 2015 में अधिनियम में संशोधन पारित किया, लेकिन डिप्लोमा धारियों से संबंधित प्रावधान पूर्ण रूप से लागू नहीं हो सका। इस पर डॉ. सीताराम शर्मा ने कहा कि बोर्ड सैद्धांतिक रूप से इस विषय पर सहमत है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार आयुर्वेद, यूनानी एवं होम्योपैथी में अनुभव आधारित डिप्लोमा धारियों के पंजीकरण की प्रक्रिया हुई है, उसी प्रकार बोर्ड के पूर्ण गठन के बाद प्राकृतिक चिकित्सा डिप्लोमा धारियों के पंजीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने तथा लंबित संशोधन को पारित कराने का प्रयास किया जाएगा। चिकित्सकों ने इस सकारात्मक पहल के लिए उनका आभार जताया।

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