महाभारत एक लाख श्लोकों वाला तेल से भरा दीपकः स्वामी श्री कमलानंद गिरि जी महाराज

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श्री कल्याण कमल आश्रम हरिद्वार के अनंत श्री विभूषित 1008 महामंडलेश्वर स्वामी श्री कमलानंद गिरि जी महाराज ने गीता पर चर्चा करते हुए कहा कि महाभारत एक लाख श्लोकों वाला तेल से भरा हुआ दीपक है। तेल और बत्ती तो हो उसमें ज्योति न हो तो अंधकार मिटता नहीं है और वह ज्योति है गीता। महाभारत रूपी तेल के भरे हुए दीपक में ज्योति है गीता। इसलिए उस गीता को अपने हृदय में बसाना जरूरी है। महाराज जी ने कहा क गीता का ज्ञान रूपी जो प्रकाश है आपके अंधकार को मिटा देगा। ऋषियों ने अंधकार को मिटाने के लिए बड़ी-बड़ी साधनाएं की, लेकिन जितना शीघ्र गीता ज्ञान प्रकाश प्रदान कर सकता है उतना साधना, तपस्या, यज्ञ आदि से प्रकाश प्राप्त नहीं होता। महाराज जी ने बताया कि स्वर्ग में एक पारिजात का वृक्ष होता है उसके नीचे बैठने वाला जो सोचता है, जो मांगता है वह वस्तु सामने आ जाती है। कल्पवृक्ष का स्वभाव यह है कि उसके नीचे बैठकर जो मांगेंगे वह सामने आ जाएगा, लेकिन कल्पवृक्ष शायद मोक्ष नहीं दे सकता, पर भगवान कृष्ण के चरणों में जो आकर गिर गया और जो मांगेगा भगवान कृष्ण दे देंगे। भगवान कृष्ण की शरण में आ जाने वाले व्यक्ति के लिए भगवान कृष्ण कल्पवृक्ष है। वह समस्त कामनाएं आसानी से पूर्ण कर देते हैं।
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