असम में बाढ़ से हालात अब भी गंभीर, 78 की मौत, 3 लाख लोग प्रभावित, IMD ने दिया नया अलर्ट

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असम में बाढ़ (assam floods 2026) का कहर अभी पूरी तरह थमा नहीं है। राज्य में इस साल बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 78 हो गई है। बुधवार को शिवसागर और गोलाघाट जिलों में तीन और लोगों की मौत के बाद यह आंकड़ा सामने आया। हालांकि कई इलाकों में पानी उतरना शुरू हो गया है, लेकिन लाखों लोग अब भी बाढ़ की मार झेल रहे हैं।

असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) के मुताबिक, फिलहाल 7 जिलों के 3,00,031 लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। बाढ़ का असर 21 राजस्व सर्किल और 551 गांवों तक फैला हुआ है। वहीं 21,523 हेक्टेयर से ज्यादा कृषि भूमि अब भी पानी में डूबी हुई है।

सबसे ज्यादा प्रभावित जिला चराइदेव है, जहां करीब 1.37 लाख लोग बाढ़ की चपेट में हैं। इसके बाद शिवसागर और जोरहाट सबसे अधिक प्रभावित जिलों में शामिल हैं। राहत की बात यह है कि मंगलवार के मुकाबले प्रभावित लोगों की संख्या में कुछ कमी आई है, लेकिन हालात अब भी गंभीर बने हुए हैं।

बाढ़ की वजह से हजारों लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े हैं। 16,500 से ज्यादा लोग फिलहाल 71 राहत शिविरों में रह रहे हैं, जबकि 72 हजार से अधिक लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है। प्रशासन, मेडिकल टीमें, पशु चिकित्सा दल, एनडीआरएफ और अन्य बचाव एजेंसियां लगातार राहत और बचाव कार्य में जुटी हुई हैं।

इस बाढ़ ने सिर्फ लोगों की जिंदगी ही नहीं, बल्कि बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। कई सड़कें, तटबंध, स्कूल और मकान क्षतिग्रस्त हो गए हैं। वहीं 11 हजार से ज्यादा पशु बह गए, जबकि 17 हजार से अधिक मवेशी बाढ़ से प्रभावित हुए हैं।

उधर, गुवाहाटी में शहरी बाढ़ की समस्या अब भी बनी हुई है। कामरूप मेट्रोपॉलिटन जिले के कई इलाकों में जलभराव है। जू रोड, हाटीगांव, लचित नगर, रुक्मिणीगांव, अनिल नगर, बोरागांव और एक्सेलकेयर अस्पताल के आसपास के इलाके अब भी पानी से प्रभावित हैं।

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इस बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से फोन पर बात कर बाढ़ की स्थिति और राहत कार्यों की जानकारी ली। गृह मंत्री ने भरोसा दिलाया कि केंद्र सरकार राहत, पुनर्वास और पुनर्निर्माण के लिए हर संभव मदद जारी रखेगी।

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि 21 जुलाई के बाद से भारी बारिश नहीं हुई है और कई जगहों पर पानी कम हुआ है, लेकिन तबाही बहुत बड़ी है। कई लोग अभी भी अपने घर नहीं लौट पा रहे हैं क्योंकि घरों में कीचड़ भर गया है या वे पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। नागालैंड की पहाड़ियों से आए मलबे के कारण कई सड़कें भी अब तक बंद हैं।मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के निर्देश पर गुरुवार को राज्य में काम कर रहे सभी बैंकों के साथ बैठक की जाएगी। इसमें बाढ़ प्रभावित लोगों के लोन से जुड़ी राहत पर चर्चा होगी।

 

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वहीं, सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने भी पूर्वोत्तर के अपने दौरे के दौरान असम में चल रहे राहत और बचाव कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने राहत कार्य में जुटे जवानों की सराहना की और सुरक्षा तैयारियों का भी जायजा लिया। हालांकि कई इलाकों में पानी घट रहा है, लेकिन मौसम विभाग ने लोगों की चिंता फिर बढ़ा दी है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने 30 जुलाई से 1 अगस्त तक असम, अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड के कई इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। तिनसुकिया जिले के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।

मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले तीन दिनों की बारिश से जलभराव, फ्लैश फ्लड और भूस्खलन का खतरा फिर बढ़ सकता है। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और सरकारी एडवाइजरी का पालन करने की अपील की है।

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