नीट-यूजी 2026 (NEET-UG 2026 Paper Leak) पेपर लीक मामले में CBI की चार्जशीट ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। जांच एजेंसी का दावा है कि पेपर लीक परीक्षा से ठीक पहले नहीं, बल्कि कई महीने पहले ही सुनियोजित तरीके से शुरू हो गया था। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में 28 जुलाई को दाखिल 94 पेज की चार्जशीट के मुताबिक, इस पूरे नेटवर्क में NTA के कुछ विशेषज्ञ, कोचिंग संचालक, बिचौलिए और अभ्यर्थी शामिल थे।
चार्जशीट में कुल 13 लोगों को आरोपी बनाया गया है, जिनमें बॉटनी विशेषज्ञ मनीषा गुरुनाथ मंधारे, केमिस्ट्री विशेषज्ञ प्रह्लाद विठ्ठलराव कुलकर्णी और फिजिक्स विशेषज्ञ मनीषा संजय हवालदार प्रमुख हैं। CBI का आरोप है कि प्रश्नपत्र तैयार करने और मॉडरेशन के दौरान ये विशेषज्ञ सवाल याद कर लेते थे। बाद में होटल पहुंचकर उन्हें कागज़ पर लिखते और फिर यह जानकारी बिचौलियों व कोचिंग नेटवर्क के जरिए आगे पहुंचाई जाती थी।
जांच में यह भी सामने आया कि फिजिक्स विशेषज्ञ मनीषा हवालदार ने कथित तौर पर सवाल पुणे के फिजिक्स लेक्चरर तेजस हर्षदकुमार शाह तक पहुंचाए। शाह ने इन हस्तलिखित नोट्स की तस्वीरें लेकर उन्हें लातूर स्थित रेणुकाई करियर सेंटर के संचालक प्रोफेसर शिवराज मोटेगांवकर को भेज दिया। CBI के मुताबिक, इस दौरान ऑनलाइन पैसों के लेन-देन के भी सबूत मिले हैं।
चार्जशीट के अनुसार, लातूर के एक अस्पताल में परीक्षा से पहले कुछ अभ्यर्थियों को बुलाया गया, जहां उन्हें पूरा प्रश्न बैंक याद कराया गया। इसके बाद लीक हुए सवालों को PDF में बदलकर टेलीग्राम के जरिए आगे भेजा गया। जांच एजेंसी का दावा है कि गुरुग्राम से जयपुर तक इस प्रश्नपत्र की खरीद-फरोख्त हुई, जहां कथित तौर पर 10 से 12 लाख रुपये में इसे उपलब्ध कराया गया। बाद में इसकी प्रिंट कॉपी निकालकर कोचिंग छात्रों, निजी ट्यूटर्स और अन्य अभ्यर्थियों तक पहुंचाई गई।
CBI का कहना है कि केंद्रीय फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला की जांच में बरामद नोटबुक और असली नीट-यूजी प्रश्नपत्र के सवाल और जवाब पूरी तरह मेल खाते हैं। इसके अलावा डिजिटल ट्रांजैक्शन के रिकॉर्ड और एक आरोपी के परिवार से बरामद पांच लाख रुपये नकद को भी जांच में अहम सबूत माना गया है। फिलहाल मामले की सुनवाई जारी है और CBI इस पूरे नेटवर्क की भूमिका की आगे भी जांच कर रही है।

































