कोविड से कितना अलग है H1N1? स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों के बीच समझें पूरा खतरा

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देश के कई हिस्सों में H1N1 इन्फ्लुएंजा के मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था अलर्ट मोड पर है। केरल में 7,421 मामले और 88 मौतें दर्ज होने की बात सामने आई है, जबकि कर्नाटक में करीब 4,000 और दिल्ली में 1,777 H1N1 संक्रमण की पुष्टि हुई है। मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, हरियाणा और गुजरात में भी मामले सामने आए हैं। चलिए जानते हैं आखिर ये वायरस कितना खतरनाक है।

क्या H1N1 कोविड जैसा खतरनाक है?
H1N1 को आम भाषा में स्वाइन फ्लू कहा जाता है। यह इन्फ्लुएंजा-A वायरस का एक सबटाइप है। इसी वायरस ने 2009 में दुनिया में महामारी का रूप लिया था। उस समय WHO के अनुसार करीब 19 हजार मौतें हुई थीं। हालांकि आज की स्थिति 2009 जैसी नहीं है। H1N1 अब मौसमी फ्लू का हिस्सा बन चुका है और इसके खिलाफ लोगों में कुछ प्रतिरोधक क्षमता भी विकसित हुई है। विशेषज्ञों के मुताबिक सामान्य मामलों में यह संक्रमण गंभीर नहीं होता और अधिकांश स्वस्थ लोग कुछ दिनों में ठीक हो जाते हैं।

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कैसे फैलता है H1N1?
संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या बातचीत करने के दौरान निकलने वाली सांस की सूक्ष्म बूंदों से यह वायरस दूसरे व्यक्ति तक पहुंच सकता है। संक्रमित व्यक्ति के करीब रहने पर संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। मोबाइल, दरवाजे के हैंडल जैसी संक्रमित सतहों को छूने के बाद आंख, नाक या मुंह छूने से भी संक्रमण फैल सकता है। इसीलिए खांसते या छींकते समय मुंह ढकना, हाथों की सफाई रखना और बीमार होने पर दूसरों से दूरी बनाए रखना जरूरी है।

H1N1 के प्रमुख लक्षण क्या हैं?
शुरुआत में इसके लक्षण सामान्य वायरल या सर्दी-जुकाम जैसे लग सकते हैं। इनमें अचानक बुखार, सिरदर्द, खांसी, गले में खराश, नाक बहना, शरीर और मांसपेशियों में दर्द, कमजोरी और भूख कम लगना शामिल हैं। कुछ मरीजों में उल्टी या दस्त की समस्या भी हो सकती है। सामान्य सर्दी की तुलना में फ्लू के लक्षण अक्सर अचानक और ज्यादा तेज दिखाई दे सकते हैं।

किन लोगों को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत?
स्वस्थ व्यक्ति में H1N1 आमतौर पर गंभीर बीमारी नहीं बनता, लेकिन बुजुर्गों, छोटे बच्चों और कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों के लिए जोखिम बढ़ सकता है। अस्थमा, डायबिटीज, हृदय रोग, किडनी या लिवर की बीमारी जैसी पहले से मौजूद स्वास्थ्य समस्याओं वाले लोगों को भी विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

कुछ दुर्लभ मामलों में फ्लू दिल की मांसपेशियों में सूजन यानी मायोकार्डिटिस जैसी गंभीर समस्या पैदा कर सकता है। सीने में दर्द, सांस लेने में परेशानी, असामान्य रूप से तेज धड़कन या शरीर में ज्यादा सूजन जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

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इलाज कैसे होता है?
हल्के मामलों में मरीज को आराम, पर्याप्त पानी और डॉक्टर की सलाह के अनुसार लक्षणों की दवाएं दी जाती हैं। कुछ मरीजों में डॉक्टर एंटीवायरल दवाएं भी दे सकते हैं, खासकर जब संक्रमण गंभीर हो या मरीज हाई-रिस्क ग्रुप में हो।H1N1 सहित मौसमी इन्फ्लुएंजा से बचाव के लिए फ्लू वैक्सीन भी उपलब्ध है। वैक्सीन संक्रमण की संभावना और गंभीर बीमारी के जोखिम को कम करने में मदद कर सकती है।

H1N1 को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन बढ़ते मामलों के बीच सावधानी जरूरी है। फ्लू जैसे लक्षण होने पर खुद से दवा लेने के बजाय डॉक्टर की सलाह लेना और हाई-रिस्क लोगों को संक्रमण से बचाना सबसे अहम है।

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