शिव महापुराण कथा में गूंजी 12 ज्योतिर्लिंगों और रुद्रावतार की पावन महिमा

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25 अगस्त को पूर्णाहुति, महाआरती और विशाल भंडारे के साथ होगा कथा का समापन
हनुमानगढ़ । पवित्र श्रावण मास के उपलक्ष्य में श्री सनातन धर्म महावीर दल न्यास, हनुमानगढ़ टाउन के तत्वावधान में आयोजित श्री शिव महापुराण कथा के आठवें दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। व्यासपीठ पर विराजमान प्रख्यात कथावाचक पंडित श्री गोपाल सुदामा जी महाराज ने भगवान आशुतोष के 12 दिव्य ज्योतिर्लिंगों के प्राकट्य तथा भगवान शिव के 12वें रुद्रावतार हनुमान जी की पावन महिमा का भावपूर्ण वर्णन किया।
कथा व्यास ने 12 ज्योतिर्लिंगों का महत्व बताते हुए कहा कि भगवान शिव के इन पवित्र स्वरूपों के दर्शन और स्मरण से मनुष्य को आध्यात्मिक शांति प्राप्त होती है। उन्होंने सोमनाथ, मल्लिकार्जुन, महाकालेश्वर, ओंकारेश्वर, केदारनाथ, भीमाशंकर, काशी विश्वनाथ, त्र्यंबकेश्वर, वैद्यनाथ, नागेश्वर, रामेश्वरम और घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंगों की महिमा का वर्णन किया। उन्होंने प्रत्येक ज्योतिर्लिंग से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं और पौराणिक प्रसंगों को श्रद्धालुओं के समक्ष सरल एवं भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया।
महाराज श्री ने भगवान शिव के 12वें रुद्रावतार हनुमान जी के प्राकट्य का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि हनुमान जी भक्ति, शक्ति, सेवा, विनम्रता और धर्मनिष्ठा के प्रतीक हैं। उनके जीवन से हमें प्रभु के प्रति समर्पण और धर्म की रक्षा का संदेश मिलता है। कथा के दौरान श्रद्धालु भक्ति में भाव-विभोर नजर आए।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में बच्चों को अच्छे संस्कार देना प्रत्येक माता-पिता और परिवार की जिम्मेदारी है। बच्चों को पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव से बचाते हुए सनातन संस्कृति से जोड़ना चाहिए। घरों में रामचरितमानस, गीता एवं अन्य धर्मग्रंथों का अध्ययन कराया जाए तथा बच्चों को भारतीय संस्कृति, परंपराओं और धार्मिक मूल्यों की जानकारी दी जाए। उन्होंने कहा कि संस्कारवान और चरित्रवान पीढ़ी ही समाज व राष्ट्र को मजबूत बना सकती है।

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