49 साल बाद लाल किला ढहने की कगार पर! देश से खत्म हुआ लेफ्ट सरकार का आखिरी गढ़

36

एक वक्त था जब देश की राजनीति में कम्युनिस्ट नेताओं का दबदबा हुआ करता था, लेकिन अब तस्वीर पूरी तरह बदलती नजर आ रही है। मौजूदा रुझानों के मुताबिक, केरल (kerala election) में लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) सत्ता खो चुकी है, 1970 के बाद पहली बार ऐसा होगा जब देश के किसी भी राज्य में वामपंथी सरकार नहीं बचेगी।

देश के पहले आम चुनाव (1951-52) में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी।
इसके बाद 1957 में केरल में दुनिया की पहली लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई कम्युनिस्ट सरकार बनी। 1977 में पश्चिम बंगाल में CPI(M) की सरकार बनी और यह सिलसिला 34 साल तक चला। जो किसी भी राज्य में सबसे लंबा शासन रहा। Buddhadeb Bhattacharjee जैसे नेताओं ने भी इस दौर में अहम भूमिका निभाई। त्रिपुरा में भी 1993 से लेकर 2018 तक लेफ्ट का मजबूत किला बना रहा, जहां Manik Sarkar ने करीब 20 साल तक मुख्यमंत्री पद संभाला।

ये भी पढ़ें: बंगाल फतह के बाद सबसे बड़ा सवाल, अब कौन बनेगा मुख्यमंत्री? BJP के सामने कई बड़े चेहरे

2004 के लोकसभा चुनावों में वामपंथी दलों ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। लेफ्ट मोर्चे ने 80 सीटें जीती। मनमोहन सिंह की पहली UPA सरकार पूरी तरह से लेफ्ट के समर्थन पर टिकी थी। नरेगा (MGNREGA) और RTI जैसे कानूनों को लागू करवाने में उनकी प्रमुख भूमिका रही।

पंचदूत अब व्हाट्सएप चैनल पर उपलब्ध है। लिंक पर क्लिक करें और अपने चैट पर पंचदूत की सभी ताज़ा खबरें पाएं।

कैसे पतन शुरु हुआ लेफ्ट का
लेफ्ट का पतन 2011 से तेज हुआ, जब Mamata Banerjee ने “परिवर्तन” के नारे के साथ पश्चिम बंगाल में भारी जीत हासिल की। इसके बाद 2018 में Bharatiya Janata Party ने त्रिपुरा में भी लेफ्ट को सत्ता से बाहर कर दिया। केरल लंबे समय तक लेफ्ट के लिए आखिरी उम्मीद बना रहा। 2016 और 2021 में Pinarayi Vijayan के नेतृत्व में लेफ्ट ने जीत हासिल की थी। लेकिन अब रुझान बता रहे हैं कि कांग्रेस के नेतृत्व वाला UDF गठबंधन आगे चल रहा है और लेफ्ट पीछे छूटता दिख रहा है।

चैनल को सब्सक्राइब करें..

देश और दुनिया की ताजा ख़बरें (Hindi News) पढ़ें। आप हमें फेसबुकट्विटरइंस्ट्राग्राम और यूट्यूब चैनल पर फॉलो कर सकते हैं।