मजदूरों की मांगों को लेकर राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन

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– महंगाई, निजीकरण और श्रम कानूनों के विरोध में श्रमिक संगठनों ने उठाई आवाज
हनुमानगढ़। देश की सभी केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर भारतीय ट्रेड यूनियन सीटू सहित विभिन्न श्रमिक संगठनों द्वारा मंगलवार को मजदूरों, कर्मचारियों और मेहनतकश जनता की समस्याओं को लेकर राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, निजीकरण, ठेका प्रथा और श्रम कानूनों में किए गए बदलावों को श्रमिक विरोधी बताते हुए सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई।
श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधि रामेश्वर वर्मा ने कहा कि आज देश का मजदूर वर्ग गंभीर आर्थिक और सामाजिक संकट से गुजर रहा है। मजदूर दिन-रात मेहनत कर देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में योगदान दे रहे हैं, लेकिन उन्हें सम्मानजनक वेतन, सामाजिक सुरक्षा और सुरक्षित कार्यस्थल जैसी मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की नीतियों के कारण मजदूरों के अधिकार लगातार कमजोर किए जा रहे हैं और श्रमिक आंदोलनों को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
ज्ञापन में सीटू जिला महासचिव शेर सिंह शाक्य कि गिरफ्तार किए गए सभी श्रमिकों और आंदोलनकारियों को तुरंत एवं बिना शर्त रिहा किया जाए तथा उनके खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस लिए जाएं। साथ ही श्रमिक विरोधी श्रम संहिताओं को वापस लेकर ट्रेड यूनियनों के साथ त्रिपक्षीय वार्ता आयोजित की जाए और भारतीय श्रम सम्मेलन बुलाया जाए।
श्रमिक संगठनों ने न्यूनतम वेतन 26 हजार रुपये प्रतिमाह निर्धारित करने, 8 घंटे का कार्यदिवस लागू करने तथा अतिरिक्त कार्य के लिए दोगुना ओवरटाइम भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की। इसके अलावा सभी श्रमिकों के लिए सुरक्षित कार्यस्थल, वैधानिक श्रम अधिकार और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की गारंटी देने की भी मांग उठाई गई।
ज्ञापन में संविदा और ठेका श्रमिकों को समान काम के लिए समान वेतन एवं अन्य सुविधाएं देने तथा उन्हें नियमित करने की मांग प्रमुख रूप से शामिल रही। संगठनों ने सार्वजनिक क्षेत्र के निजीकरण पर रोक लगाने और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों को नियंत्रित करने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि रसोई गैस की बढ़ती कीमतों से आम मजदूर परिवारों का बजट पूरी तरह बिगड़ गया है, इसलिए सस्ती एलपीजी उपलब्ध कराई जाए।

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