ईरान-अमेरिका तनाव के बीच अब भारत में भी असर दिखने लगा है। केंद्र सरकार ने बुधवार को सोने और चांदी पर आयात शुल्क 6 प्रतिशत (today gold rate) से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया। सरकार का कहना है कि बढ़ते वैश्विक संकट के बीच विदेशी मुद्रा बचाना बेहद जरूरी हो गया है।
यही वजह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार लोगों से अपील कर रहे हैं कि फिलहाल सोने की खरीद टालें, गैर-जरूरी विदेश यात्रा से बचें और ईंधन की खपत कम करें। आज यानी 13 मई को वायदा बाजार यानी MCX पर सोना 10 हजार और चांदी 18 हजार रुपए महंगी हो गई है।
वित्त मंत्रालय ने 13 मई से सोशल वेलफेयर सरचार्ज और एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस में भी बढ़ोतरी की है। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण तेल, गैस और धातुओं की सप्लाई पर दबाव बढ़ गया है, जिसका असर भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों पर पड़ रहा है।
सरकार के नए फैसले के बाद अब सोने पर कुल कस्टम ड्यूटी बढ़कर 15 प्रतिशत हो गई है। भारत में 2025-26 के दौरान सोने का आयात 24 प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर 71.98 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। हालांकि मात्रा के हिसाब से आयात थोड़ा घटकर 721 टन रहा, लेकिन सोने की कीमतों में भारी उछाल के कारण कुल खर्च तेजी से बढ़ा।
सोने की कीमत भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। दिल्ली में 10 ग्राम सोने का भाव करीब 1,56,800 रुपये तक पहुंच गया, जबकि वायदा बाजार में कीमत 1.63 लाख रुपये के पार निकल चुकी है। वहीं चांदी की कीमतों में भी बड़ा उछाल देखने को मिला है और यह करीब 2.82 लाख रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है।

दिलचस्प बात यह है कि सरकार ने पिछले साल ही ज्वेलरी इंडस्ट्री को बढ़ावा देने और तस्करी रोकने के लिए सोने पर कस्टम ड्यूटी घटाकर 6 प्रतिशत की थी। लेकिन अब हालात बदलने के बाद सरकार को फिर से ड्यूटी बढ़ानी पड़ी है। इससे पहले 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भी भारत ने सोने पर आयात शुल्क बढ़ाकर 15 प्रतिशत किया था।
सरकार ने ऐसा क्यों किया?
भारत में लोग सोना बहुत खरीदते हैं। हमारा देश दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है। सोने की मांग को पूरा करने करने के लिए हमे इसे विदेश से मंगाना पड़ता है। इसके लिए डॉलर खर्च होते हैं। जब देश से ज्यादा पैसा बाहर जाने लगता है, तो देश की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ता है। इसी ‘आयात’ को कम करने के लिए सरकार ने टैक्स के नियम कड़े किए हैं।
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