ममता को दो-दो बार हराने वाला ‘जायंट स्लेयर’ बना बंगाल का CM! जानें क्यों आज तक कुंवारे हैं सुवेंदु अधिकारी?

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पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव लाते हुए Suvendu Adhikari को शुक्रवार को औपचारिक रूप से बीजेपी विधायक दल का नेता चुन लिया गया। हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में Bharatiya Janata Party की ऐतिहासिक जीत के बाद अब सुवेंदु अधिकारी राज्य के अगले मुख्यमंत्री बनाए गए। उन्होंने बांग्ला में ईश्वर के नाम की शपथ ली। शपथ के बाद सुवेंदु, पीएम के पास गए और उनके पैर छुए।

बंगाल के गवर्नर आरएन रवि ने सुवेंदु के अलावा 4 और विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई। इनमें दिलीप घोष, अग्निमित्रा पाल, निषिथ प्रमाणिक और अशोक का नाम शामिल है। इस दौरान PM मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, NDA और BJP शासित राज्यों के 20 मुख्यमंत्री मौजूद रहे। मोदी ने मंच पर रवींद्रनाथ टैगोर को उनकी 165वीं जयंती पर श्रद्धाजंलि दी।

इससे पहले शुक्रवार को बैठक में केंद्रीय गृहमंत्री Amit Shah केंद्रीय पर्यवेक्षक के तौर पर मौजूद रहे, जबकि Mohan Charan Majhi सह-पर्यवेक्षक की भूमिका में शामिल हुए। अमित शाह ने घोषणा करते हुए कहा, “मैं सुवेंदु अधिकारी को पश्चिम बंगाल बीजेपी विधायक दल का निर्वाचित नेता घोषित करता हूं।”

15 साल बाद बंगाल में BJP की वापसी
2026 पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 294 सदस्यीय विधानसभा में 207 सीटें जीतकर शानदार बहुमत हासिल किया। वहीं All India Trinamool Congress 80 सीटों पर सिमट गई। इस जीत के साथ राज्य में ममता बनर्जी के 15 साल पुराने शासन का अंत हो गया।

55 वर्षीय सुवेंदु अधिकारी इस चुनाव में बीजेपी के सबसे बड़े चेहरे बनकर उभरे। उन्होंने भवानीपुर सीट पर तत्कालीन मुख्यमंत्री Mamata Banerjee को 15,105 वोटों से हराकर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया। वहीं नंदीग्राम सीट पर भी उन्होंने टीएमसी उम्मीदवार पवित्र कर को 9,665 वोटों से मात दी।

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‘जायंट स्लेयर’ कैसे बने सुवेंदु अधिकारी?
सुवेंदु अधिकारी को बंगाल की राजनीति में “जायंट स्लेयर” कहा जाता है। जायंट स्लेयर” (Giant Slayer) उस व्यक्ति को कहा जाता है जो किसी बहुत बड़े, ताकतवर या लंबे समय से मजबूत माने जाने वाले प्रतिद्वंदी को हराकर बड़ा उलटफेर कर दे। इसकी शुरुआत 2021 के नंदीग्राम चुनाव से हुई थी, जब उन्होंने ममता बनर्जी को बेहद करीबी मुकाबले में करीब 1,956 वोटों से हराया था। यही चुनाव बंगाल की राजनीति का टर्निंग पॉइंट माना गया। इसके बाद उन्हें विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनाया गया और बीजेपी की राज्य रणनीति का प्रमुख चेहरा बनकर उभरे।

TMC छोड़ BJP में आने से बदली बंगाल की राजनीति
सुवेंदु अधिकारी पूर्वी मिदनापुर के एक प्रभावशाली राजनीतिक परिवार से आते हैं। उनके पिता Sisir Adhikari लोकसभा और विधानसभा दोनों में प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। वहीं उनके भाई Dibyendu Adhikari भी पहले टीएमसी में थे और बाद में बीजेपी में शामिल हो गए।

सुवेंदु ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत 1995 में कांग्रेस से की थी। बाद में 1998 में पिता के साथ टीएमसी में शामिल हुए। लेकिन पार्टी के भीतर मतभेद बढ़ने के बाद उन्होंने 2020 में बीजेपी का दामन थाम लिया। उनके इस फैसले ने बंगाल की राजनीति का पूरा समीकरण बदल दिया।

क्यों नहीं की शादी? खुद बताया कारण
सुवेंदु अधिकारी अपनी निजी जिंदगी को लेकर भी चर्चा में रहते हैं। उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया था कि उन्होंने शादी नहीं करने का फैसला पूरी तरह राजनीति और जनसेवा को समर्पित रहने के लिए लिया। उन्होंने कहा था, “मैं अविवाहित हूं और ब्रह्मचर्य का सबसे बड़ा फायदा यह है कि मेरे पास काम के लिए ज्यादा समय रहता है और कोई निजी जिम्मेदारी नहीं होती।”

सुवेंदु ने बताया कि वे छात्र राजनीति से ही सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहे हैं और स्वतंत्रता सेनानी Satish Samanta, Sushil Dhara और Ajoy Mukherjee से प्रेरित रहे हैं। उन्होंने कहा कि ये सभी नेता अविवाहित रहे और उन्होंने भी उसी रास्ते पर चलने का फैसला किया। उन्होंने यह भी कहा कि वे अपने माता-पिता की जिम्मेदारी खुद निभाते हैं और राजनीति का इस्तेमाल परिवार या रिश्तेदारों के हित के लिए नहीं करना चाहते। यही वजह है कि उन्होंने अविवाहित रहने का फैसला लिया।

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