मातृ दिवस पर अनाथ बच्चों और बुजुर्ग माताओं के बीच बंधा स्नेह का रिश्ता

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-सशक्त नारी संस्थान की अनूठी पहल, वृद्धाश्रम में बच्चों संग मनाया मातृ दिवस
हनुमानगढ़। 
मातृ दिवस के अवसर पर सशक्त नारी संस्थान द्वारा रविवार को टाउन स्थित अपनाघर वृद्धाश्रम में भावनात्मक एवं प्रेरणादायी कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की विशेष बात यह रही कि संस्थान की ओर से एकलव्य अनाथ आश्रम के बच्चों को वृद्धाश्रम ले जाकर वहां रह रहे बुजुर्ग माता-पिता से मिलवाया गया। इस अनूठी पहल के माध्यम से बच्चों को मातृत्व का स्नेह और बुजुर्गों को अपनापन देने का प्रयास किया गया।
कार्यक्रम के दौरान वृद्धाश्रम का माहौल बेहद भावुक और पारिवारिक नजर आया। अनाथ आश्रम के बच्चों ने बुजुर्ग माताओं के साथ मिलकर केक काटा और मातृ दिवस की खुशियां साझा कीं। इसके बाद बच्चों और बुजुर्गों के बीच मिठाइयों, केक एवं उपहारों का वितरण किया गया। बच्चों ने बुजुर्ग माताओं के साथ समय बिताया, उनका हालचाल जाना और उनसे आशीर्वाद प्राप्त किया। वहीं बुजुर्गों के चेहरों पर भी बच्चों के साथ समय बिताकर खुशी और आत्मीयता साफ दिखाई दी।
सशक्त नारी संस्थान की अध्यक्ष मित्ताली अग्रवाल ने कहा कि आज के समय में समाज में संवेदनाएं और पारिवारिक मूल्य लगातार कमजोर होते जा रहे हैं। ऐसे में बच्चों और वर्तमान पीढ़ी को संस्कारवान बनाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि मातृ दिवस केवल उत्सव नहीं, बल्कि मां और बुजुर्गों के प्रति सम्मान व्यक्त करने का अवसर है। इसी उद्देश्य को लेकर संस्थान ने छोटे बच्चों के साथ वृद्धाश्रम में यह कार्यक्रम आयोजित किया, ताकि बच्चों में बुजुर्गों के प्रति सम्मान, प्रेम और सेवा की भावना विकसित हो सके।
उन्होंने कहा कि समाज में ऐसे अनेक बुजुर्ग हैं जो अपने परिवार से दूर वृद्धाश्रमों में जीवन व्यतीत कर रहे हैं, वहीं कई बच्चे ऐसे हैं जो माता-पिता के स्नेह से वंचित हैं। ऐसे में इन दोनों पीढ़ियों को एक मंच पर लाकर भावनात्मक जुड़ाव स्थापित करने का प्रयास किया गया है।
संस्था सचिव प्रीति गुप्ता ने बताया कि इस प्रकार के सामाजिक कार्यक्रम समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का माध्यम बनते हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों को केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि संस्कार और मानवीय संवेदनाएं देना भी जरूरी है। वृद्धाश्रम में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों में सेवा, सम्मान और अपनत्व की भावना विकसित करना था।

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