मनरेगा मजदूरों की 160 रुपये मजदूरी के खिलाफ पंचायत समिति पर प्रदर्शन

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विकास अधिकारी को ज्ञापन सौंपा, मांगों पर बनी सहमति; 3 सितंबर को जिला परिषद कार्यालय के घेराव का ऐलान
हनुमानगढ़। राजस्थान खेत एवं ग्रामीण मजदूर यूनियन, हनुमानगढ़ के नेतृत्व में आज ग्राम पंचायत गुरुसर, नंदराम वाली ढाणी के मनरेगा मजदूरों को मात्र 160 रुपये मजदूरी मिलने के विरोध में पंचायत समिति कार्यालय, हनुमानगढ़ टाउन पर प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन के दौरान मनरेगा का काम लगातार जारी रखने तथा कार्य स्थल पर आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करवाने की मांग की गई। मजदूरों ने मांग की कि उन्हें पूरी मजदूरी का भुगतान किया जाए तथा कार्यस्थल पर पीने का पानी, छांव, दवाई, बच्चों के लिए पालना एवं झूले सहित आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
प्रदर्शन के दौरान जब पंचायत समिति के विकास अधिकारी द्वारा मजदूरों की समस्याओं को अनसुना किया गया तो मजदूरों में रोष फैल गया। इसके बाद मजदूरों और अधिकारियों के बीच काफी बहस हुई। बातचीत के बाद इस बात पर सहमति बनी कि वर्तमान में चल रहे पखवाड़े की मजदूरी बढ़ाकर दी जाएगी तथा मनरेगा का काम लगातार जारी रखा जाएगा। सहमति बनने के बाद मजदूर शांत हुए और धरना-प्रदर्शन समाप्त किया गया। इसके बाद यूनियन की ओर से विकास अधिकारी को ज्ञापन भी सौंपा गया। 3 सितंबर को जिला परिषद कार्यालय का घेराव
पंचायत समिति कार्यालय के समक्ष आयोजित सभा को संबोधित करते हुए रघुवीर वर्मा ने कहा कि पूरे इलाके में मनरेगा मजदूरों को पूरी मजदूरी नहीं दी जा रही है और बड़ी संख्या में मजदूरों को काम भी नहीं मिल रहा है। मजदूरों के अधिकारों की लगातार अनदेखी की जा रही है। उन्होंने घोषणा की कि 3 सितंबर 2026 को जिला परिषद कार्यालय का घेराव किया जाएगा और मनरेगा मजदूर अपने हक की लड़ाई आर-पार लड़ेंगे। सभा को संबोधित करते हुए खेत मजदूर यूनियन के जिला अध्यक्ष जगजीत सिंह जग्गी ने कहा कि लंबे समय से प्रशासन से मांग की जा रही है कि पूरे जिले में मनरेगा का काम शुरू किया जाए। उन्होंने कहा कि जिले में लगभग दो लाख एक्टिव मजदूर होने के बावजूद करीब 50 हजार मजदूरों को काम नहीं मिल रहा है, जो बेहद गंभीर स्थिति है। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के नेताओं द्वारा नए कानून के बाद 125 दिन काम और 300 रुपये मजदूरी मिलने की बातें कही गई थीं, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत है। न तो मनरेगा का काम पर्याप्त रूप से चल रहा है और न ही मजदूरों को पूरी मजदूरी मिल रही है। ऐसी स्थिति में अब मजदूर आर-पार की लड़ाई लड़ने के लिए मजबूर हैं। जिला सचिव पहलाद बैलोल नगर ने कहा कि मजदूरों के सामने अब आंदोलन के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। लगातार मांग-पत्र और ज्ञापन देने के बावजूद अधिकारियों द्वारा मजदूरों की समस्याओं का समाधान नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कच्चे काम मंजूर नहीं किए जा रहे हैं और पक्के कामों में भी मजदूरों को पर्याप्त रोजगार नहीं मिल रहा है। इससे ग्रामीण मजदूरों के सामने गंभीर आर्थिक संकट पैदा हो सकता है।

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