भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी (Fuel Price Hike) कर दी गई है। पेट्रोल के दाम में 2.61 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 2.71 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है। पिछले दो हफ्तों में यह चौथी बार है जब ईंधन के दाम बढ़ाए गए हैं। इस दौरान कुल मिलाकर पेट्रोल-डीजल करीब 7.5 रुपये महंगे हो चुके हैं।
सरकारी तेल कंपनियां लंबे समय तक अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बावजूद घरेलू दरों में बदलाव नहीं कर रही थीं, जिससे उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा था। अब उसी नुकसान की भरपाई के लिए कीमतों में लगातार बढ़ोतरी की जा रही है।
बताया जा रहा है कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में तेजी का मुख्य कारण अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव है। इस संघर्ष के चलते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर असर पड़ा है, जो दुनिया में तेल सप्लाई का बेहद अहम समुद्री रास्ता माना जाता है।
इससे पहले 23 मई को भी पेट्रोल की कीमत में 87 पैसे और डीजल में 91 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी। वहीं 16 मई को भी दोनों ईंधनों के दाम में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई थी। अप्रैल 2022 के बाद से ईंधन की कीमतें काफी समय तक स्थिर थीं। केवल मार्च 2024 में लोकसभा चुनाव से पहले 2 रुपये प्रति लीटर की कटौती की गई थी।
जानें शहरों के रेट
नई कीमतों के बाद Delhi में पेट्रोल 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर हो गया है। वहीं Mumbai में पेट्रोल 111.21 रुपये और डीजल 97.83 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। Kolkata में पेट्रोल 113.51 रुपये और डीजल 99.82 रुपये पहुंच गया है, जबकि Chennai में पेट्रोल 107.77 रुपये और डीजल 99.55 रुपये प्रति लीटर हो गया है।
पेट्रोल-डीजल की कीमतों में क्यों हुई बढ़ोतरी?
इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव है। ईरान और अमेरिका की जंग शुरू होने से पहले क्रूड ऑयल के दाम 70 डॉलर थे, जो अब बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए हैं।
क्रूड की कीमतें बढ़ने से तेल कंपनियां दबाव में थीं। इसलिए कंपनियों ने घाटे की भरपाई के लिए यह कदम उठाया है। अगर कच्चे तेल की कीमतों में लंबे समय तक तेजी बनी रहती है तो पेट्रोल-डीजल की कीमतें और भी बढ़ाई जा सकती हैं।
हालांकि इस बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में कुछ गिरावट भी देखने को मिली। अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते की उम्मीदों के चलते ब्रेंट क्रूड की कीमत 5 प्रतिशत से ज्यादा गिरकर 98.22 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जबकि WTI क्रूड 91.57 डॉलर प्रति बैरल तक लुढ़क गया। बाद में इनमें थोड़ी रिकवरी भी देखी गई।

विशेषज्ञों का कहना है कि पेट्रोल-डीजल के दाम लगातार बढ़ने से परिवहन और लॉजिस्टिक्स की लागत बढ़ेगी, जिसका असर रोजमर्रा की चीजों और खाने-पीने के सामान की कीमतों पर भी पड़ सकता है। सरकार का कहना है कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता और बढ़ते आयात खर्च के बीच ईंधन सप्लाई को स्थिर बनाए रखने के लिए यह कदम जरूरी था।
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