हनुमानगढ़। जिले में मानसून सक्रिय होने के साथ ही पशुपालकों के लिए पशुओं की विशेष देखभाल जरूरी हो गई है। विशेषज्ञों के अनुसार बारिश के मौसम में पशुशाला में पानी जमा नहीं होने देना चाहिए तथा फर्श और बिछावन को सूखा व साफ रखना चाहिए। गीले और गंदे वातावरण से पशुओं में संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है, जिससे दूध उत्पादन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
दुग्ध देने वाली गाय और भैंसों में इस मौसम में मस्टाइटिस (थनैला) बीमारी का खतरा अधिक रहता है। इस बीमारी में थन में सूजन, दर्द, गर्माहट, दूध में थक्के, खून या पानी जैसा दूध आने जैसी समस्याएं दिखाई दे सकती हैं। पशुपालकों को दुहाई से पहले और बाद में थनों की अच्छी तरह सफाई करनी चाहिए तथा बीमारी के शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। समय पर उपचार से पशु को होने वाले नुकसान और दूध उत्पादन में कमी से बचा जा सकता है।
पशुपालन विशेषज्ञों का कहना है कि हनुमानगढ़ जिले के पशुपालक बारिश के दौरान पशुओं को संतुलित आहार, स्वच्छ पेयजल और खनिज मिश्रण उपलब्ध कराएं। साथ ही पशुशाला में नियमित सफाई रखें और आवश्यक टीकाकरण समय पर करवाएं। थोड़ी सी सावधानी अपनाकर मस्टाइटिस सहित कई मौसमी बीमारियों से पशुओं की सुरक्षा की जा सकती है।
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