मां भद्रकाली के समक्ष सरस्वती नदी पर बंधेगा पवित्र रक्षा सूत्र
हनुमानगढ़। आने वाले रक्षाबंधन पर्व पर हनुमानगढ़ एक ऐतिहासिक और अनोखी परंपरा का साक्षी बनेगा। यहां मां भद्रकाली के मंदिर के समक्ष कल-कल बहती सरस्वती नदी की धारा पर विश्व की सबसे बड़ी 181 फीट लंबी गोबर की राखी बांधी जाएगी। इस विशेष अवसर की जानकारी देते हुए भाजपा पूर्व जिलाध्यक्ष देवेंद्र पारीक ने बताया कि यह अनूठा आयोजन श्रावण शुक्ला त्रयोदशी संवत् 2082, गुरुवार, 07 अगस्त 2025 को सुबह 9 बजे चुनरी और नारियल अर्पित कर शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरस्वती नदी के कारण ही प्राचीन काल से यह धरती उपजाऊ रही है। वर्तमान में भी हमारा यह क्षेत्र ‘धान का कटोरा’ कहलाता है और गेहूं-चावल की विशाल पैदावार इसी पुण्य सलिला की देन है। इसलिए हम सबका दायित्व है कि सरस्वती नदी की पूजा-अर्चना करें और इसके संरक्षण के प्रति जागरूक रहें। । उक्त संबंध में रविवार को टाउन फाटक गौशाला में गौभक्तों की बैठक का आयोजन किया गया।
सरस्वती नदी का वैदिक और पौराणिक महत्व
पंडित विष्णु दत्त शर्मा ने विस्तार से बताया कि सरस्वती नदी अत्यंत प्राचीन नदी है, जो वर्तमान में पाताल में भी बहती है और धरती पर मां भद्रकाली के समक्ष कल-कल करती हुई प्रवाहित होती है। वैदिक ऋचाओं, स्कंद पुराण, महाभारत, ब्रह्मवैवर्त पुराण सहित अनेक ग्रंथों में इसकी महिमा का विस्तृत वर्णन मिलता है। प्राचीन काल से ही इस नदी में स्नान, जल का आचमन और इसकी पूजा करने का विधान है। भव्य आयोजन में उमड़े गे सैकड़ों गौभक्त ।
इस पावन अवसर पर सैकड़ों गौभक्तों ने भव्यता के साथ मां भद्रकाली और सरस्वती नदी पर चुनरी भेंट करने व साथ विशाल गोबर की राखी बांधने के कार्यक्रम की सराहना की। उपस्थित लोगों ने इस आयोजन को गौरवपूर्ण परंपरा बताते हुए इसे पंजाब,हरियाणा व राजस्थान के हनुमानगढ़ व गंगानगर जिले के साथ मिलकर भविष्य में भी इसे जारी रखने का संकल्प लिया।
गौ माता का दूध अमृत समान
भारतीय गौवंश समाधान है, समस्या नहीं – पं. विष्णु दत्त शर्मा
इस अवसर पर मुख्य वक्ता पंडित विष्णु दत्त शर्मा, सचिव कृषि उपज मंडी हनुमानगढ़ जंक्शन ने कहा कि भारतीय गौवंश को समस्या नहीं, बल्कि समाधान के रूप में देखना चाहिए। उन्होंने बताया कि गोवंश आधारित अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने के लिए गोबर से बने उत्पादों का निर्माण किया जा रहा है, जैसे गोबर गणेश, एंटी रेडिएशन रक्षा सूत्र आदि। इसी कड़ी में सैकड़ों उत्पाद गौशालाओं के माध्यम से तैयार किए जा रहे हैं ।उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन जैसे पावन पर्व पर स्वदेशी और पवित्र रक्षा सूत्र अपनाने की प्रेरणा देने हेतु श्री राधा कृष्ण गौशाला पंडितावली के माध्यम से लाखों राखियां बनवाई गई हैं। इनमें सबसे विशेष 181 फीट लंबी यह विशाल राखी है, जिसका निर्माण भारतीय गौवंश के पवित्र गोबर, भारत माता की मिट्टी और गंगाजल से किया गया है। इसके रंग भी प्राकृतिक हैं – हल्दी, चंदन, सिंदूर और केसर से तैयार। इस कार्य में मांगीलाल शर्मा और गोपाल कुमावत का विशेष सहयोग रहा । जो माँ सरस्वती नदी कोा बांधी जाएगी । कार्यक्रम में भीम सिंह राधव,भाजपा मंडल अध्यक्ष प्रकाश तंवर, सुशील जैन, एडवोकेट सुरेंद्र जलंधरा, राजेश दादरी, पूर्व प्रधान टिब्बी पंचायत समिति काला सिंह, कपूर सिंह, सुरेंद्र सिंह शेखावत माँ भद्र काली क्षेत्र विकास समिति, भागीरथ सुथार, हरदीप सिंह रोड़ीकपुरा सरपंच, सहदेव सीवर, और विकास शर्मा पूर्व मंडल अध्यक्ष, महेंद्र सिंह राठौड़ पूर्व मंडल अध्यक्ष, राजेश जिंगल, हरीश माली, सुरेंद्र वर्मा, मुरलीधर गर्ग,गुरदीप सिंग पार्षद,संदीप छाबड़ा,राजेश शर्मा,शुभेन्द्र सिंह शेरी,जसपाल सिंह,गजेन्द्र सिंह शेखावत,सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने अपने विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि गौ माता का दूध वास्तव में औषधि है, जो शरीर को स्वस्थ और निरोग बनाता है।गो माता हमारी संस्कृति और जीवन का आधार हैं। इन्हें बेसहारा न छोड़ें, इनकी सेवा और संरक्षण करें। गो माता का पूजन कर पुण्य अर्जित करें, क्योंकि ये हमें दूध, खाद और जीवनोपयोगी संसाधन देती हैं। गो माता की रक्षा हमारा धर्म और कर्तव्य है।
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