महिला आरक्षण पर कांग्रेस का भाजपा सरकार पर तीखा हमला

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-बिना शर्त 33% आरक्षण तुरंत लागू करने की मांग, देरी को बताया राजनीतिक रणनीति
हनुमानगढ़। महिला आरक्षण के मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर जोरदार हमला बोला है। शुक्रवार को जिला कांग्रेस कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में पार्टी नेताओं ने 33 प्रतिशत महिला आरक्षण को बिना किसी शर्त के तत्काल लागू करने की मांग उठाई। नेताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार इस महत्वपूर्ण कानून को जानबूझकर लंबित रखकर महिलाओं के अधिकारों से खिलवाड़ कर रही है।
प्रेस वार्ता को अनूपगढ़ विधायक शिमला नायक, कांग्रेस जिलाध्यक्ष मनीष मक्कासर, जिला प्रमुख कविता मेघवाल, महिला कांग्रेस जिलाध्यक्ष सुलोचना बावरी, प्रदेश सचिव कृतिका चौधरी, ब्लॉक अध्यक्ष राजेश्वरी गोस्वामी, जिला उपाध्यक्ष संतोष नायक, नगर अध्यक्ष रेखा राजपूत, प्रधान अमनदीप कौर, मंजू सोनी, श्रेयस श्रीपानी, मोनिका देवी और माया नायक सहित कई नेताओं ने संबोधित किया। इस दौरान बड़ी संख्या में महिला पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
जिलाध्यक्ष मनीष मक्कासर ने बताया कि यह प्रेस वार्ता प्रदेश नेतृत्व के निर्देश पर आयोजित की गई है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस महिला आरक्षण को महिलाओं का संवैधानिक अधिकार मानती है, जबकि भाजपा इसे केवल राजनीतिक मुद्दा बनाकर पेश कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार महंगाई, बेरोजगारी और किसानों से जुड़े मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए इस विषय का इस्तेमाल कर रही है।
अनूपगढ़ विधायक शिमला नायक ने कहा कि महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में कांग्रेस का ऐतिहासिक योगदान रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1996 में महिला आरक्षण विधेयक को संसद में लाने और 2010 में इसे राज्यसभा से पारित कराने में कांग्रेस की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इसके अलावा 73वें और 74वें संविधान संशोधन के माध्यम से पंचायतीराज और नगरीय निकायों में 33 प्रतिशत आरक्षण लागू कर महिलाओं को नेतृत्व के अवसर प्रदान किए गए।
नेताओं ने आरोप लगाया कि वर्ष 2023 में पारित ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को भाजपा सरकार ने जनगणना और परिसीमन से जोड़ दिया है, जिससे इसके लागू होने में अनावश्यक देरी हो रही है। जिला प्रमुख कविता मेघवाल ने कहा कि यदि सरकार की नीयत साफ होती तो इस कानून को लागू करने में कोई बाधा नहीं आती। उन्होंने ओबीसी वर्ग की महिलाओं को भी आरक्षण का लाभ दिलाने के लिए जातीय जनगणना कराने की मांग उठाई।

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