खतरनाक कुत्तों को मौत का इंजेक्शन दें, SC ने आवारा कुत्तों के लिए दिए 9 निर्देश, जानें पूरा मामला?

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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को आवारा कुत्तों (supreme court dogs case) से जुड़े मामलों पर सुनवाई करते हुए अहम टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि यदि कोई कुत्ता गंभीर रूप से बीमार है या लोगों के लिए खतरा बन चुका है, तो उसे इंजेक्शन देकर खत्म किया जा सकता है। कोर्ट ने साफ कहा कि आम लोगों की सुरक्षा सबसे ज्यादा जरूरी है।

साथ ही अदालत ने चेतावनी दी कि जो अधिकारी कोर्ट के निर्देशों का पालन नहीं करेंगे, उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जा सकती है। मामले में दाखिल सभी याचिकाओं को भी कोर्ट ने खारिज कर दिया।

सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने कई राज्यों के आंकड़े रखे गए। अदालत ने कहा कि केवल राजस्थान के श्रीगंगानगर में एक महीने के भीतर कुत्तों के काटने के 1084 मामले सामने आए। रिपोर्ट्स में यह भी बताया गया कि कई छोटे बच्चों को गंभीर चोटें आईं और उनके चेहरे तक बुरी तरह जख्मी हो गए।

वहीं तमिलनाडु में इस साल के शुरुआती चार महीनों में करीब 2 लाख डॉग बाइट के मामले दर्ज किए गए। इससे पहले नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने स्कूल, अस्पताल, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन जैसे सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने का निर्देश दिया था। अदालत ने कहा था कि ऐसे कुत्तों को शेल्टर होम में रखा जाए और दोबारा सड़कों पर न छोड़ा जाए।

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कोर्ट ने सार्वजनिक जगहों पर आवारा कुत्तों को खाना खिलाने पर भी रोक लगाने की बात कही थी। इसके खिलाफ कई डॉग लवर्स और एनजीओ ने आदेश को चुनौती देते हुए याचिकाएं दाखिल की थीं। मामले की सुनवाई जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने की।

हमें मजाक में लेने की गलती न करें
बता दें, पिछले सुनवाई 29 जनवरी को हुई थी, जिसमें बेंच ने फैसला सुरक्षित रखा था। इस दौरान राज्यों, नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) और एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया (AWBI) ने दलीलें रखी थीं। कोर्ट ने कहा था कि आवारा कुत्तों के किसी हमले में चोट या मौत होती है, तो नगर निकाय के साथ ही डॉग फीडर्स की जिम्मेदारी भी तय की जा सकती है। कोर्ट ने कहा था कि हमारी टिप्पणियों को मजाक समझना गलत होगा। हम गंभीर हैं। कोर्ट जिम्मेदारी तय करने से पीछे नहीं हटेगा क्योंकि मौजूदा व्यवस्था में स्थानीय प्रशासन की विफलता सामने आई है।

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क्या-क्या सख्त निर्देश दिए सुप्रीम कोर्ट ने 

  • राज्य सरकारें पशु कल्याण बोर्ड (AWBI) के नियमों को मजबूत करें और सही तरीके से लागू करें।
  • हर जिले में कम से कम 1 पूरी तरह काम करने वाला ABC सेंटर ( एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर) बनाया जाए।
  • जहां आबादी ज्यादा है, वहां जरूरत के हिसाब से ABC सेंटरों की संख्या बढ़ाई जाए।
  • कोर्ट के आदेशों और पशु कल्याण नियमों को पूरी तरह लागू किया जाए।
  • जनता की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए दूसरे सार्वजनिक स्थानों पर भी ये नियम लागू करने पर फैसला लिया जाए और उसे तय समय में लागू किया जाए।
  • एंटी-रेबीज दवाइयों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
  • NHAI राष्ट्रीय राजमार्गों पर आवारा पशुओं की समस्या से निपटने के लिए जरूरी कदम उठाए, जैसे पुराने ट्रांसपोर्ट वाहनों का इस्तेमाल कर उन्हें हटाना। NHAI इसके लिए मॉनिटरिंग और समन्वय व्यवस्था भी बनाए।
  • रेबीज से संक्रमित या बेहद खतरनाक कुत्तों के मामले में, कानून के तहत जरूरत पड़ने पर यूथेनेशिया (दया मृत्यु) जैसे कदम उठाए जा सकते हैं ताकि लोगों की जान सुरक्षित रहे।
  • कोर्ट के आदेश लागू करने वाले नगर निगम और सरकारी अधिकारियों को कानूनी सुरक्षा दी जाए। सामान्य तौर पर उनके खिलाफ FIR या सख्त कार्रवाई न की जाए।

क्या है आवारा कुत्तों का मामला?
यह मामला 28 जुलाई 2025 को शुरू हुआ था। सुप्रीम कोर्ट ने देश में आवारा कुत्तों के हमलों और उनसे होने वाली मौतों पर स्वतः संज्ञान लिया था। 11 अगस्त 2025 को कोर्ट ने दिल्ली-NCR से 8 हफ्ते के भीतर सभी आवारा कुत्तों को पकड़कर शेल्टर होम में भेजने का आदेश दिया था।

इसके खिलाफ विरोध होने पर 22 अगस्त 2025 को कोर्ट ने अपने आदेश में बदलाव किया। कोर्ट ने कहा कि जिन कुत्तों में रेबीज नहीं है और जो आक्रामक नहीं हैं, उन्हें नसबंदी और टीकाकरण के बाद उसी इलाके में छोड़ा जा सकता है, जहां से पकड़ा गया था। बाद में मामले का दायरा पूरे देश तक बढ़ा दिया गया। 7 नवंबर 2025 को कोर्ट ने अंतरिम आदेश में राज्यों और NHAI को हाईवे, अस्पताल, स्कूल और दूसरे संस्थानों के आसपास से आवारा जानवर हटाने को कहा था।

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