राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन NDA के उपराष्ट्रपति कैंडिडेट, जानिए क्यों BJP ने इस नाम को चुना?

17 अगस्त 2025 को भाजपा और एनडीए ने उन्हें उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किया। पार्टी का मानना है कि उनके चयन से दक्षिण भारत में राजनीतिक संतुलन साधा जा सकेगा और राष्ट्रीय स्तर पर संगठन को मजबूती मिलेगी।

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महाराष्ट्र के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन NDA (C. P. Radhakrishnan) के उपराष्ट्रपति पद (Vice President Election ) के उम्मीदवार होंगे। रविवार को हुई भाजपा संसदीय दल की बैठक में उनके नाम पर सहमति बनी। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राधाकृष्णन के नाम का ऐलान किया।

बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, जेपी नड्डा और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत कई नेता मौजूद थे। राधाकृष्णन 21 अगस्त को नामांकन दाखिल करेंगे। इस दौरान NDA शासित राज्यों के सभी मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री भी शामिल होंगे।

उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए 9 सितंबर को वोटिंग होगी। उसी दिन काउंटिंग भी होगी। नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 21 अगस्त है। 25 अगस्त तक उम्मीदवारी वापस ली जा सकती है। दरअसल, जगदीप धनखड़ ने 21 जुलाई की रात अचानक उपराष्ट्रपति के पद से इस्तीफा दे दिया था। 74 साल के धनखड़ का कार्यकाल 10 अगस्त 2027 तक था।

सी. पी. राधाकृष्णन के बारें में
सी. पी. राधाकृष्णन का जन्म 1957 में तमिलनाडु के तिरुप्पुर में हुआ। वे शुरू से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े रहे और 1974 में जनसंघ के तमिलनाडु राज्य कार्यकारिणी समिति के सदस्य बने। राजनीति में उनकी सक्रियता बढ़ती गई और 1996 में वे भाजपा की तमिलनाडु इकाई के सचिव बने।

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1998 और 1999 में उन्होंने कोयम्बत्तूर लोकसभा सीट से सांसद का चुनाव जीता और संसद में अपनी छाप छोड़ी। वे टेक्सटाइल्स पर संसदीय स्थायी समिति के प्रमुख रहे, वित्त और सार्वजनिक उपक्रमों से जुड़ी समितियों में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्हें स्टॉक एक्सचेंज घोटाले की जांच समिति का हिस्सा भी बनाया गया था।

तमिलनाडु भाजपा के अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने 93 दिनों तक चलने वाली रथ यात्रा निकाली, जिसमें उन्होंने नदियों को जोड़ने, आतंकवाद के खिलाफ आवाज उठाने, समान नागरिक संहिता लागू करने और सामाजिक बुराइयों को खत्म करने जैसे मुद्दे उठाए। राधाकृष्णन भारत की तरफ से संयुक्त राष्ट्र महासभा में भी प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा रहे और ताइवान की यात्रा करने वाले पहले संसदीय दल में भी शामिल हुए। उनकी पहचान एक ईमानदार और ज़मीनी नेता की है, जिनका राजनीतिक जीवन चार दशकों से भी ज्यादा लंबा रहा है।

राजनीतिक सफर के दौरान उन्हें कई संवैधानिक जिम्मेदारियाँ भी मिलीं। वे झारखंड के राज्यपाल बने, फिर तेलंगाना के राज्यपाल और पुदुचेरी के उपराज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार संभाला। 31 जुलाई 2024 को उन्होंने महाराष्ट्र के राज्यपाल का पदभार संभाला। दक्षिण भारत में भाजपा को मजबूत करने और संगठनात्मक स्तर पर पार्टी को दिशा देने में उनका अहम योगदान माना जाता है।

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क्यों चुना NDA ने सी. पी. राधाकृष्णन को
17 अगस्त 2025 को भाजपा और एनडीए ने उन्हें उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किया। पार्टी का मानना है कि उनके चयन से दक्षिण भारत में राजनीतिक संतुलन साधा जा सकेगा और राष्ट्रीय स्तर पर संगठन को मजबूती मिलेगी। विवादों से लगभग दूर रहने वाले राधाकृष्णन की छवि साफ-सुथरे और भरोसेमंद राजनेता की है, जिनकी राजनीति हमेशा वैचारिक और सामाजिक मुद्दों के इर्द-गिर्द रही है।

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