इजरायल और अमेरिका (iran israel war) ने मिलकर ईरान पर बहुत बड़ा हवाई हमला किया है। एक साथ तेहरान में 30 जगहों पर बैलिस्टिक मिसाइलों से यह हमला किया गया है। जिन जगहों पर हमले की खबर है, उनमें खुफिया मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय, सुप्रीम लीडर खामेनेई का ऑफिस और ईरान का परमाणु ऊर्जा संगठन शामिल हैं। हमले के बाद खामेनेई को सुरक्षित जगह शिफ्ट कर दिया गया है।
ईरान ने भी इजराइल पर जवाबी हमले शुरू कर दिए हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने पलटवार करते हुए करीब 400 मिलाइलें दागी हैं। इजराइल ने ईरान के खिलाफ अपने नए अभियान का नाम ‘लियोनस् रोर’ (शेर की दहाड़) रखा है। वहीं अल जजीरा ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि यह अमेरिका और इजराइल का जॉइंट मिलिट्री एक्शन है।
यह हमला ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु हथियारों को लेकर चल रही बातचीत के बीच हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान पर हमले की धमकी दी थी। उन्होंने कहा कि इस कार्रवाई का मकसद अमेरिका और उसके लोगों को खतरे से बचाना है।
मिडिल ईस्ट में अमेरिकी बेस पर ईरान का हमला, UAE को निशाना बनाया
ईरान ने इजराइली हमले के जवाब में मिडिल ईस्ट में मौजूद अमेरिकी बेस पर हमला करना शुरू कर दिया है। कतर और बहरीन के बाद ईरान ने UAE में अमेरिकी मिलिट्री बेस पर हमला किया है। UAE में अमेरिकी मिलिट्री बेस का नाम अल दाफ्रा एयर बेस है।
हमले के बाद ट्रंप का पहला बयान, ईरान को कभी परमाणु शक्ति नहीं बनने देंगे
ईरान पर हमले के बाद ट्रंप का पहला बयान सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि ईरान को कभी परमाणु शक्ति नहीं बनने देंगे। 47 साल से हम देखते आ रहे हैं कि उन्होंने बहुत लोगों की हत्या की। अमेरिकी लोगों को भी मारा। ऑपरेशन मिडनाइट हैमर लांच कर दिया गया है। हमने ईरान के फोर्दो, इस्फहान पर हमला किया है। ईरान ने हमारे सारे ऑफर ठुकराये। ईरान पर हमला ही आखिरी विकल्प था। खामेनेई अब हथियार डालें या मौत का सामना करें।
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