जापान अपनी अलग संस्कृति और लोगों के बीच आपसी सम्मान के लिए जाना जाता है, लेकिन इन दिनों वहां एक नया सामाजिक मुद्दा चर्चा में है। बढ़ते प्रवासन और बदलती आबादी को लेकर लोगों की राय बंटी हुई है। पहले जहां विदेशी कामगारों का स्वागत हो रहा था, अब कुछ लोग इसे अपनी पहचान के लिए खतरा मानने लगे हैं।
हाल ही में फुजीसावा शहर में एक नई मस्जिद (Japan Muslim) बनाने के प्रस्ताव को लेकर विरोध शुरू हो गया। बड़ी संख्या में स्थानीय लोग सड़कों पर उतर आए। उनका कहना है कि मस्जिद का आकार आसपास के पारंपरिक शिंटो मंदिरों से बड़ा होगा, जिससे इलाके की पुरानी पहचान पर असर पड़ सकता है। सोशल मीडिया पर भी इसके वीडियो सामने आए हैं, जिनमें लोग अपनी नाराजगी जाहिर करते दिख रहे हैं। हालात संभालने के लिए पुलिस को भी काफी मेहनत करनी पड़ी।
जापान में मुस्लिम आबादी तेजी से बढ़ी
अगर आंकड़ों की बात करें तो जापान में मस्जिदों की संख्या पिछले कुछ सालों में तेजी से बढ़ी है। 1999 में करीब 15 मस्जिदें थीं, जो 2008 तक 50 हो गईं और अब 2025 तक 160 से ज्यादा पहुंच चुकी हैं। टोक्यो, ओसाका, नागोया और योकोहामा जैसे बड़े शहरों में यह बदलाव ज्यादा नजर आ रहा है।
मुस्लिम आबादी भी बढ़ी है। 2010 में करीब 1 लाख लोग थे, जो 2024 तक बढ़कर करीब 4.2 लाख हो गए हैं। हालांकि, यह अभी भी जापान की कुल आबादी का सिर्फ 0.3 प्रतिशत ही है। इनमें से ज्यादातर लोग दूसरे देशों से आए हैं, जबकि कुछ जापानी लोगों ने भी इस्लाम धर्म अपनाया है।
इस बढ़ोतरी की बड़ी वजह जापान की कम होती जन्मदर और बुजुर्ग होती आबादी है। काम करने वाले लोगों की कमी को पूरा करने के लिए सरकार ने विदेशी कामगारों को आने की इजाजत दी है। खासकर इंडोनेशिया जैसे देशों से लोग नर्सिंग और केयरगिविंग जैसे कामों के लिए आ रहे हैं।

कुछ जापानी लोग शादी या अपनी पसंद की वजह से इस्लाम अपना रहे हैं। इससे अलग-अलग संस्कृतियों वाले परिवार भी बढ़ रहे हैं। एक बड़ा विवाद अंतिम संस्कार की परंपरा को लेकर भी है। जापान में ज्यादातर लोग दाह संस्कार करते हैं, जबकि इस्लाम में दफनाने की परंपरा है। दफनाने की जगह कम होने और पर्यावरण से जुड़ी चिंताओं की वजह से यह मुद्दा भी कई जगहों पर विवाद खड़ा कर रहा है।
इसके अलावा, कुछ लोगों को मस्जिदों से होने वाली अजान की आवाज और त्योहारों के समय बढ़ने वाली भीड़ से भी परेशानी है। उनका कहना है कि इससे शांत इलाकों का माहौल बदल जाता है। सरकार के लिए यह स्थिति आसान नहीं है। एक तरफ उसे देश की अर्थव्यवस्था के लिए विदेशी कामगारों की जरूरत है, तो दूसरी तरफ लोगों की भावनाओं का भी ध्यान रखना है। ऐसे में आने वाले समय में इमिग्रेशन और धार्मिक जगहों को लेकर नए नियम बनाए जा सकते हैं।
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