– संयुक्त ठेकेदार यूनियन ने मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन, कार्य अवधि बढ़ाने की भी मांग
हनुमानगढ़। संयुक्त ठेकेदार यूनियन हनुमानगढ़ श्रीगंगानगर ने मंगलवार को मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर के माध्यम से ज्ञापन सौंपकर लंबित भुगतानों, डीजल आपूर्ति संकट, ईंट भट्टों की मनमानी दरों और प्राइस एक्सक्लेशन लागू नहीं होने जैसे मुद्दों पर तत्काल समाधान की मांग उठाई। यूनियन ने चेतावनी दी कि यदि समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो जिले में निर्माण कार्य प्रभावित हो सकते हैं। यूनियन के सदस्यों ने बताया कि यूनियन के ठेकेदारों द्वारा जो ईएमडी धरोहर राशि एवं एसडी का भुगतान भी सरकार द्वारा नही दिया जा रहा, जबकि यह राशि टेंडर न मिलने पर तुरंत प्रभाव से दी जाती है।
पीडब्ल्यूडी यूनियन के अध्यक्ष सुरेंदर रेवाड़, सीएडी के अध्यक्ष पवन सहारण व डब्लूआरडी अध्यक्ष मोहन नैन ने ज्ञापन में बताया कि मार्च 2026 के बाद किए गए अधिकांश राजकीय निर्माण कार्यों का भुगतान आज दिनांक तक नहीं हुआ है। विभिन्न विभागों द्वारा बिल कोष कार्यालय में भेजे जाने के बावजूद ईसीएस प्रक्रिया लगभग तीन माह से लंबित पड़ी है। इसके कारण ठेकेदारों की आर्थिक स्थिति कमजोर होती जा रही है तथा बाजार में उनकी साख पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है। यूनियन ने मांग की कि ईसीएस भुगतान के लिए एक निश्चित समय सीमा निर्धारित की जाए ताकि ठेकेदारों को समय पर भुगतान मिल सके। उन्होंने बताया कि गंग कैनाल का कार्य पूर्ण होने के बावजूद भी पिछले 6 माह से कार्य पूर्ण होने के बावजूद भी सरकार ने बजट जारी नहीं किया, जबकि आश्वस्त किया गया था कि मार्च तक भुगतान कर दिया जाएगा।
ज्ञापन में डीजल संकट का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। यूनियन ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और युद्ध जैसे हालात के चलते राज्य सरकार द्वारा डीजल वितरण पर सीमा तय कर दी गई है, जिससे निर्माण कार्यों को गति देना कठिन हो गया है। छोटे ठेकेदारों को प्रतिदिन 250 से 300 लीटर डीजल की आवश्यकता रहती है, लेकिन पर्याप्त आपूर्ति नहीं मिलने से मशीनरी संचालन और परिवहन प्रभावित हो रहा है। ठेकेदारों ने मांग की कि जब तक डीजल आपूर्ति सामान्य नहीं हो जाती, तब तक सभी निर्माण कार्यों की समयावधि बिना किसी क्षतिपूर्ति के बढ़ाई जाए।
इसके अलावा ईंट भट्टा संचालकों पर भी गंभीर आरोप लगाए गए। यूनियन ने कहा कि अप्रैल 2026 में जिन ईंटों की कीमत लगभग 5500 रुपये प्रति हजार थी, वही अब बढ़ाकर 8500 रुपये प्रति हजार कर दी गई है। आरोप लगाया गया कि कई भट्टा संचालक जीएसटी बिल भी जारी नहीं कर रहे हैं और मनमाने दाम वसूल रहे हैं। यूनियन ने प्रशासन से ईंट भट्टों में हो रही कथित कालाबाजारी पर रोक लगाने की मांग की।
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