आज इतिहास लिखेगा Vikram-1, ISRO के बाद अब प्राइवेट सेक्टर की सबसे बड़ी परीक्षा, जानें क्या है खास?

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भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र एक नए दौर में प्रवेश करने जा रहा है। अगर सब कुछ योजना के मुताबिक रहा, तो 18 जुलाई सुबह 11:30 बजे श्रीहरिकोटा से Skyroot Aerospace का Vikram-1 रॉकेट लॉन्च (Skyroot Vikram 1 launch) होगा। लेकिन लॉन्च से 5 मिनट पहले काउंटडाउन रोक दिया गया है। कुछ देर में ऑटोमैटिक लॉन्च सिक्वेंस को दोबारा शुरू किया जाएगा।

यह भारत का पहला निजी (प्राइवेट) तौर पर विकसित ऑर्बिटल रॉकेट होगा, जिसका लक्ष्य पृथ्वी की कक्षा (Orbit) तक पहुंचना है। यह मिशन सिर्फ एक रॉकेट लॉन्च नहीं, बल्कि भारत के निजी स्पेस सेक्टर के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

कंपनी ने 2022 में विक्रम-S सबऑर्बिटल रॉकेट लॉन्च किया था, जो 89.5 km की ऊंचाई तक गया था। अब विक्रम-1 450 km की पृथ्वी की निचली कक्षा तक जाएगा। इस लॉन्चिंग को ‘मिशन आगमन’ नाम दिया गया है। इसके तहत विक्रम-1 रॉकेट अपने साथ टेक्नोलॉजी से लेकर कला से जुड़े पेलोड्स अंतरिक्ष में ले जा रहा है।

क्या लेकर जाएगा Vikram-1?
इस मिशन में भारतीय और विदेशी ग्राहकों के छोटे उपग्रह, कमर्शियल पेलोड और एक्सपेरिमेंटल पेलोड भेजे जाएंगे। मिशन सफल होने के साथ ही, Skyroot नियमित कमर्शियल लॉन्च सेवाएं शुरू कर सकता है। कॉस्मोस डायमंड्स की कलाकृति “कॉस्मिक ब्लूम” और एक खास माइक्रो-आर्ट पीस भी रॉकेट में भेजा जा रहा है। यह माइक्रो-आर्ट पीस 18 कैरेट सोने से बना छोटा सा रॉकेट है। इस पर वैज्ञानिक सर सी वी रमन, डॉ. विक्रम साराभाई और डॉ. कलाम की सूक्ष्म मूर्तियां उकेरी गई हैं।

ISRO की क्या रही भूमिका?
Skyroot के मुताबिक ISRO ने इस पूरी यात्रा में महत्वपूर्ण सहयोग दिया। टेस्टिंग सुविधाएं उपलब्ध कराईं. लॉन्च इंफ्रास्ट्रक्चर दिया. तकनीकी सहयोग मिला। ISRO के वर्षों में विकसित 400 से ज्यादा प्राइवेट सप्लायर नेटवर्क का लाभ मिला यानी यह सफलता ISRO और प्राइवेट सेक्टर के सहयोग का बेहतरीन उदाहरण है।


क्यों खास है भारत के लिए ये मिशन?
यह लॉन्चिंग भारत के प्राइवेट स्पेस सेक्टर के लिए गेम चेंजर हो सकती है। अब तक सैटेलाइट लॉन्च करने का काम केवल सरकारी एजेंसी ‘इसरो’ ही करती थी, लेकिन अब प्राइवेट कंपनियां भी इसमें हिस्सेदार बन रही हैं। इससे देश की स्पेस इकोनॉमी मजबूत होगी। नए स्टार्टअप्स को बढ़ावा मिलेगा और स्पेस सेक्टर में बड़े पैमाने पर निवेश और रोजगार के मौके पैदा होंगे। स्काईरूट जैसी घरेलू प्राइवेट कंपनियों के आने से विदेशी सैटेलाइट कंपनियों को भारत में बेहद सस्ते, भरोसेमंद और ऑन-डिमांड लॉन्चिंग विकल्प मिलेंगे।

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