नरेंद्र मोदी सरकार के 12 साल के कार्यकाल में पहली बार किसी केंद्रीय मंत्री ने इस्तीफा दिया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान (Dharmendra Pradhan) के इस्तीफे को बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा है। धर्मेंद्र प्रधान 2021 में पहली बार केंद्रीय शिक्षा मंत्री बने थे और 2024 के लोकसभा चुनावों में भाजपा की जीत के बाद उन्हें दोबारा यही जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
यह इस्तीफा सिर्फ बाहरी दबाव नहीं था, बल्कि बीजेपी के भीतर के सियासी भूचाल को भी दिखाता है। धर्मेंद्र प्रधान सिर्फ एक मंत्री नहीं, बल्कि ओडिशा में बीजेपी के 20 सांसदों के ‘नेता’ थे। जब उन पर इस्तीफे का दबाव बढ़ा, तो उन्होंने 22 जुलाई को इन 20 सांसदों के साथ एक फोटो पोस्ट करके स्पष्ट संकेत दिया। ‘मुझे हटाने की कोशिश करो और देखो क्या होता है। ‘ क्योंकि NDA के पास लोकसभा में सिर्फ 298 सीटें हैं (बहुमत 272 से 26 ऊपर)। यह इस्तीफा दिखाता है कि बीजेपी के अंदरूनी गलियारों में भी दरार आ गई है।
वहीं दूसरी ओर, 12 सालों में RSS ने कभी भी किसी जनआंदोलन के दबाव में बीजेपी को झुकने का संकेत नहीं दिया, लेकिन इस बार ऐसा हुआ. RSS प्रमुख मोहन भागवत ने 25 जुलाई को एक कार्यक्रम में कहा, ‘अब वह समय नहीं है जब मां-बाप कहें और बच्चे चुप रहें। नई पीढ़ी सवाल पूछती है और तर्क मांगती है। अब हुक्म नहीं, संवाद करना होगा, सहमति बनानी होगी।’
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर सामने आते ही जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे आंदोलनकारियों में खुशी की लहर दौड़ गई। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सोनम वांगचुक ने हाल ही में अनिश्चितकालीन अनशन शुरू किया था और प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा शामिल था।
सूत्रों के अनुसार, धर्मेंद्र प्रधान ने मौजूदा स्थिति की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए स्वयं इस्तीफा दिया, उन्हें पद से हटाया नहीं गया। माना जा रहा है कि सरकार ने बढ़ते दबाव के बीच उन्हें सम्मानजनक तरीके से पद छोड़ने का अवसर दिया।
मोदी सरकार में इस्तीफा देने वाले दूसरे केंद्रीय मंत्री
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2014 में सत्ता संभालने के बाद, धर्मेंद्र प्रधान जनदबाव के चलते इस्तीफा देने वाले दूसरे मौजूदा केंद्रीय मंत्री बन गए हैं। इससे पहले एम. जे. अकबर ने अक्टूबर 2018 में विदेश राज्य मंत्री के पद से इस्तीफा दिया था। उन पर कई महिला पत्रकारों ने यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। अकबर ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि वे अदालत में कानूनी लड़ाई लड़ना चाहते हैं, इसलिए उन्होंने व्यक्तिगत क्षमता में इस्तीफा दिया।
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ऐसे समय आया है जब केंद्र सरकार और आंदोलनकारी संगठन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बीच तीसरे दौर की बातचीत होने वाली है। CJP पहले ही स्पष्ट कर चुकी थी कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा उनकी “गैर-समझौतावादी” (Non-Negotiable) मांग है।
12 साल में पहली बार किसी केंद्रीय मंत्री का इस्तीफा
2014 में नरेंद्र मोदी के पहली बार प्रधानमंत्री बनने के बाद से अब तक कई बड़े राजनीतिक विवाद, जन आंदोलन और देशव्यापी प्रदर्शन हुए, लेकिन किसी केंद्रीय मंत्री ने आंदोलन के दबाव में इस्तीफा नहीं दिया था। ऐसे में धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मोदी सरकार के 12 साल के कार्यकाल का पहला मंत्रीस्तरीय इस्तीफा माना जा रहा है।
देश के बड़े आंदोलन में सरकार ने समझौता किया
इससे पहले नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ देशभर में लंबे समय तक प्रदर्शन हुए थे। दिल्ली के शाहीन बाग समेत कई राज्यों में महीनों तक आंदोलन चला, लेकिन केंद्र सरकार ने कानून वापस नहीं लिया और न ही किसी केंद्रीय मंत्री का इस्तीफा हुआ। ये ही नहीं एक साल से ज्यादा चलने वाले किसान आंदोलन भी देश के सबसे लंबे आंदोलनों में शामिल रहा. करीब एक वर्ष तक दिल्ली की सीमाओं पर किसान डटे रहे. आखिरकार केंद्र सरकार ने तीनों कृषि कानून वापस लेने का फैसला किया, लेकिन उस दौरान भी किसी केंद्रीय मंत्री ने इस्तीफा नहीं दिया।

देश के युवाओं ने साबित किया
कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके ने कहा, क्या कह रहे थे, इस सरकार में इस्तीफे नहीं होते। झुकती है दुनिया झुकाने वाला चाहिए। मंत्री का इस्तीफा तो हो गया है, लेकिन हमारी दो और मांगे हैं।’ उन्होंने कहा, सुबह हो गई मामू, जनता जाग गई। हम ऐसे नहीं जाएंगे कॉकरोच एक बार घुसता है तो निकलता नहीं है। जिन बच्चों ने सुसाइड किया उनके परिवार को एक करोड़ मुआवजा मिले। पुलिस वालों पर एक्शन होना चाहिए।
अभिजीत ने कहा, ‘हमनें तो एक मंत्री का इस्तीफा ले लिया तो तुम लोग क्या चीज हो। छात्रों पर केस वापस होने चाहिए। भईया ये लोकतंत्र है। मुझे एक महीने से लोग कहते थे क्या कर रहे हो कब तक बेठोगे। ये इस्तीफा नहीं देंगे। ये मनमानी सरकार है। मगर हमने कर दिखाया।’
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