2014 में पहली बार मोदी सरकार बनने के बाद 12 साल के कार्यकाल में धर्मेंद्र प्रधान पहले मंत्री हैं, जिन्हें विरोध के चलते इस्तीफा देना पड़ा है। इस्तीफे के बाद जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के प्रमुख अभिजीत दीपके ने कहा- वे कहते थे, इस सरकार में इस्तीफे नहीं होते, लेकिन झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए। प्रधान ने इस्तीफे को लेकर चिट्ठी पोस्ट की। दो पेज और 575 शब्दों में लिखी है।
इस इस्तीफे के बाद सोशल मीडिया पर अभिजीत दीपके का बयान काफी वायरल है जिसमें ये कहते सुना गया कि BJP कहती थी, हमारे यहां इस्तीफे (Cjp Protest) नहीं होते बस मांगने वाला चाहिए। दरअसल जून 2015 में तत्कालीन गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि हमारे यहां इस्तीफे नहीं होते हैं। यह UPA सरकार नहीं है।
दरअसल, भाजपा सरकार पर भगोड़े ललित मोदी की गुपचुप तरीके से मदद करने के आरोप लगे थे। तब सुषमा स्वराज विदेश मंत्री थीं। कांग्रेस ने कहा कि ललित मोदी एक भगोड़ा अपराधी है, लेकिन सरकार उसकी मदद कर रही है। ऐसे में विदेश मंत्री को इस्तीफा देना चाहिए।
जरा ये भी सुनिये…
ये यूपीए नहीं NDA सरकार, यहां मंत्रियों के इस्तीफे नहीं होते.. #flashback pic.twitter.com/g5OnZLek8u— Sitaram Silawat INC (@sitaram_silawat) July 25, 2026
इससे पहले, शुक्रवार रात NEET पेपर लीक मामले में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के 47 अधिकारी बर्खास्त किए गए थे। बर्खास्त अधिकारियों के खिलाफ क्रिमिनल केस दर्ज करने की बात भी कही गई। एक दिन पहले सरकार ने गुरुवार को शिक्षा मंत्रालय के दो सचिवों को बदला था।

29 साल पहले पेपर लीक मुद्दे पर खुद आंदोलन कर चुके हैं प्रधान
29 साल पहले पेपर लीक मुद्दे पर धर्मेन्द्र प्रधान ने भी विरोध प्रदर्शन किया था। प्रधान के सहयोगी रहे प्रशांत राउत ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि 1997 में ओडिशा में एक पेपर लीक हुआ था, तब प्रधान ने प्रदर्शन किया था। इसमें करीब 1,500 छात्र शामिल हुए। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज कर दिया था। धर्मेंद्र प्रधान को बुरी तरह पीटा गया था। उनके शरीर में कई जगह चोटें आईं और फ्रैक्चर भी हुआ था।
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