जीएसटी में बड़ा बदलाव: केवल दो टैक्स स्लैब, रोजमर्रा की चीजें होंगी सस्ती

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भारत में लागू वस्तु एवं सेवा कर (GST) को शुरू हुए आठ साल हो चुके हैं। इसे देश की अब तक की सबसे बड़ी अप्रत्यक्ष कर सुधार पहल माना जाता है, जिसने अलग-अलग राज्यों और केंद्र के टैक्स ढांचे को एकसमान बनाकर व्यापार को आसान किया। अब केंद्र सरकार जीएसटी संरचना में एक और बड़ा बदलाव करने जा रही है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, प्रस्ताव है कि मौजूदा चार मुख्य स्लैब्स को घटाकर केवल दो स्लैब 5% और 18% कर दिए जाएं।

क्या है नया प्रस्ताव
वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के आधार पर यह प्रस्ताव तैयार किया गया है। फिलहाल जीएसटी में 5%, 12%, 18% और 28% के टैक्स स्लैब हैं। नए प्रस्ताव के तहत 28% वाले स्लैब की 90% वस्तुएं 18% स्लैब में शिफ्ट कर दी जाएंगी। इसी तरह 12% स्लैब की 99% वस्तुएं 5% स्लैब में लाई जाएंगी। इसका सीधा असर यह होगा कि रोजमर्रा के इस्तेमाल की कई चीजों की कीमतों में कमी आएगी और उपभोग को बढ़ावा मिलेगा।

सरकार का मानना है कि जब लोग ज्यादा खरीदारी करेंगे, तो टैक्स संग्रह अपने आप बढ़ेगा और कम दरों से होने वाले संभावित राजस्व घाटे की भरपाई हो जाएगी।

मौजूदा स्लैब प्रस्तावित बदलाव उदाहरण (संभावित)
28% 90% वस्तुएं 18% में कई इलेक्ट्रॉनिक और घरेलू सामान
12% 99% वस्तुएं 5% में पैकेज्ड फूड, कुछ कपड़े
5% यथावत आवश्यक वस्तुएं
40% (नया) लक्ज़री और सिन गुड्स तंबाकू, गुटखा, सिगरेट


लक्ज़री और सिन गुड्स पर सख्ती
इस नई संरचना में एक अलग 40% का स्लैब भी होगा, जिसमें विलासिता और सिन गुड्स जैसे तंबाकू, गुटखा और सिगरेट को रखा जाएगा। इस श्रेणी में केवल 5 से 7 वस्तुएं होंगी। हालांकि, रेफ्रिजरेटर, एयर कंडीशनर और वॉशिंग मशीन जैसी आकांक्षी वस्तुओं को इसमें शामिल नहीं किया जाएगा। पेट्रोलियम उत्पाद अभी भी जीएसटी के दायरे से बाहर रहेंगे, यानी उन पर मौजूदा केंद्रीय और राज्य सरकार के कर ही लगते रहेंगे।

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किन क्षेत्रों पर रहेगा मौजूदा टैक्स
हीरे और कीमती पत्थरों जैसे उच्च श्रम-प्रधान और निर्यातोन्मुखी क्षेत्रों में फिलहाल की टैक्स दरें ही लागू रहेंगी। इन क्षेत्रों में बदलाव न करने का मकसद है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय उद्योग की प्रतिस्पर्धा बनी रहे।

क्यों जरूरी समझा गया यह बदलाव
वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, मौजूदा जीएसटी संग्रह में सबसे ज्यादा लगभग 67% राजस्व 18% स्लैब वाले उत्पादों से आता है। 28% स्लैब से लगभग 11%, 12% स्लैब से 5% और 5% स्लैब से 7% राजस्व आता है। इसका मतलब है कि ऊंची दर वाले स्लैब में ज्यादा वस्तुएं होने से उपभोग सीमित हो रहा है, जिसे कम करके अर्थव्यवस्था में रफ्तार लाने की कोशिश की जाएगी।

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सरकारी सूत्रों का कहना है कि नई दर संरचना से आम आदमी, महिलाएं, छात्र, किसान और मध्यम वर्ग को सीधा फायदा होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के भाषण में “डबल दिवाली” की बात करते हुए जीएसटी में सुधार की घोषणा की थी, जिसका मकसद समाज के सभी वर्गों को लाभ पहुंचाना है।

कब हो सकता है लागू
जीएसटी काउंसिल, जिसमें सभी राज्यों के वित्त मंत्री शामिल होते हैं, इस प्रस्ताव पर सितंबर या अक्टूबर 2025 में बैठक कर सकती है। मंजूरी मिलने के बाद इसे अगले वित्त वर्ष से लागू करने की संभावना है। जैसा कि आज प्रधानमंत्री मोदी ने अपने लाल किले से भाषण में इसकी जानकारी दी थी कि दीवाली पर देशवासियों को उपहार मिलने वाला है।

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आठ साल की यात्रा और आगे का रास्ता
जीएसटी को 2017 में लागू किया गया था, जिसका उद्देश्य देशभर में एक समान अप्रत्यक्ष कर ढांचा बनाना था। इसने कई तरह के जटिल टैक्स जैसे वैट, सर्विस टैक्स, एक्साइज ड्यूटी आदि को खत्म करके व्यापार को आसान बनाया। छोटे और मध्यम उद्यमों के लिए यह सुधार विशेष रूप से फायदेमंद रहा है, हालांकि समय-समय पर दरों और संरचना को लेकर विवाद भी हुए हैं।

अब यह नया बदलाव जीएसटी को और सरल बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम होगा। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो उपभोक्ताओं की जेब पर बोझ कम होगा, उपभोग बढ़ेगा और लंबे समय में अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिलेगी।

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