कांग्रेस में बगावत के सुर! राहुल गांधी के एंगेस्ट गए ये 4 दिग्गज लीडर, जानें क्या है पूरा मामला?

229

ऑपरेशन सिंदूर के बाद ईरान में चल रहे युद्ध और LPG सप्लाई की स्थिति ने कांग्रेस के भीतर मतभेद पैदा कर दिए हैं। कमल नाथ, आनंद शर्मा, शशि थरूर और मनीष तिवारी सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने मिडिल ईस्ट में युद्ध और भारत में ईंधन आपूर्ति को लेकर मोदी सरकार के रुख पर राहुल गांधी (Rahul gandhi) से अलग राय रखी है।

लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी लगातार अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध को लेकर मोदी सरकार की कूटनीतिक नीति पर हमला बोलते रहे हैं। लेकिन कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता बार-बार उनसे अलग रुख अपनाते हुए सरकार के दृष्टिकोण की तारीफ करते नजर आए हैं।

राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की विदेश नीति को “समझौता किया हुआ” बताया है। वहीं कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने इसे “जिम्मेदार राज्यकला” कहा।

राहुल गांधी ने केंद्र सरकार से ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या की निंदा करने की मांग की थी। खामेनेई की मौत के कुछ दिनों बाद भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास में शोक-पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए, जो इस मामले में भारत की पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया थी।

ये भी पढ़ें: आम आदमी पार्टी क्यों पड़ी राघव चड्ढा के पीछे? पार्टी ने खोला मोर्चा, मचा सियासी घमासान, VIDEO

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने एक टीवी न्यूज चैनल पर वेस्ट एशिया युद्ध पर बात करते हुए कहा कि “सरकार संभवतः सही काम कर रही है।”  गुरुवार को कांग्रेस के दो वरिष्ठ नेताओं पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ ने भी सरकार के रुख की सराहना की।

आनंद शर्मा ने X पर कई पोस्ट करते हुए सरकार की कूटनीतिक रणनीति की तारीफ की और इसे “परिपक्व और कुशल” बताया। उन्होंने राष्ट्रीय एकता की भी अपील की। कमल नाथ ने LPG मुद्दे पर पार्टी के रुख को खारिज करते हुए कहा, “ऐसी कोई कमी नहीं है। सिर्फ माहौल बनाया जा रहा है कि कमी है।”

बीजेपी ने इस विवाद को कांग्रेस पर हमला करने का मौका बना लिया
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने X पर लिखा, “अब कांग्रेस नेता कमल नाथ ने खुद स्वीकार किया है कि देश में पेट्रोल, डीजल या गैस की कोई कमी नहीं है। कांग्रेस को अब डर और अविश्वास फैलाना बंद करना चाहिए।” बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा, “कांग्रेस के नेता जानते हैं कि राहुल गांधी एक अवसरवादी हैं।”

दो मुद्दों ने कांग्रेस को दो हिस्सों में बांटा
कांग्रेस में नेताओं का पार्टी लाइन से अलग जाना कोई नई बात नहीं है। 7 मई 2025 को ऑपरेशन सिंदूर के बाद भी ऐसा ही देखा गया था, जब भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर हमला किया था। उस समय भी शशि थरूर ने पार्टी से अलग रुख अपनाते हुए देशहित को प्राथमिकता दी और सरकार का समर्थन किया, जबकि राहुल गांधी सरकार की “राजनीतिक इच्छाशक्ति” पर सवाल उठा रहे थे। मोदी सरकार ने ऑपरेशन सिंदूर पर भारत का पक्ष रखने के लिए 59 सांसदों का सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल बनाया था।

कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि इस प्रतिनिधिमंडल के चयन में पार्टी नेतृत्व से सलाह नहीं ली गई। पार्टी ने आनंद शर्मा, गौरव गोगोई, सैयद नसीर हुसैन और अमरिंदर सिंह राजा वारिंग के नाम सुझाए थे। इसके बावजूद शशि थरूर को एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व भी दिया गया था।

ऑपरेशन सिंदूर पर राहुल गांधी ने सरकार पर आरोप लगाया था कि हमले प्रधानमंत्री की छवि बचाने के लिए किए गए थे। वहीं थरूर और तिवारी ने भारतीय सेना की कार्रवाई की सराहना की और पार्टी के बयान से दूरी बना ली। इसके चलते संसद में बहस के दौरान दोनों को बोलने का मौका नहीं दिया गया।

अब अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध ने एक बार फिर कांग्रेस को बांट दिया है, जहां आनंद शर्मा सरकार की तारीफ कर रहे हैं और कमल नाथ LPG संकट को लेकर पार्टी के दावों को खारिज कर रहे हैं।

पंचदूत अब व्हाट्सएप चैनल पर उपलब्ध है। लिंक पर क्लिक करें और अपने चैट पर पंचदूत की सभी ताज़ा खबरें पाएं।

कैसे अलग है नेताओं का रुख
आनंद शर्मा ने कहा, “भारत ने इस संकट को बहुत परिपक्व और कुशल तरीके से संभाला है और संभावित जोखिमों से बचा है।” उन्होंने यह भी कहा कि भारत की नीति को राष्ट्रीय सहमति का समर्थन मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार ने इस अनिश्चित और अस्थिर स्थिति में सभी दलों को जानकारी देने के लिए बैठक की है और राष्ट्रीय संवाद जारी रहना चाहिए।

कमल नाथ ने दूसरी ओर LPG को लेकर कहा कि “राज्य में गैस की कोई कमी नहीं है” और कुछ लोग राजनीतिक फायदे के लिए घबराहट फैला रहे हैं। इन बयानों से साफ है कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अपनी ही पार्टी के शीर्ष नेतृत्व, खासकर राहुल गांधी से अलग रुख अपना रहे हैं, खासकर ऐसे मुद्दों पर जो देश की विदेश नीति और घरेलू आपूर्ति से जुड़े हैं।

देश और दुनिया की ताजा ख़बरें (Hindi News) पढ़ें। आप हमें फेसबुकट्विटरइंस्ट्राग्राम और यूट्यूब चैनल पर फॉलो कर सकते हैं।