ई-मित्र संचालकों ने संविदा सेवा नियम में शामिल करने सहित चार प्रमुख मांगें उठाईं

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– 15 अगस्त तक समाधान नहीं होने पर मुख्यमंत्री आवास के बाहर अनिश्चितकालीन धरने की चेतावनी
हनुमानगढ़। ग्राम पंचायत ई-मित्र संचालक संघ समिति राजस्थान ने ग्राम पंचायत स्तर पर कार्यरत ई-मित्र प्लस ऑपरेटरों एवं ई-मित्र संचालकों की विभिन्न लंबित मांगों को लेकर मुख्यमंत्री के नाम जिला कलक्टर के माध्यम से जिलाध्यक्ष कृष्ण सोनी के नेतृत्व में ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में संचालकों को संविदा सेवा नियमों में शामिल कर नियमित मानदेय देने, सरकारी शिविरों में ड्यूटी भत्ता प्रदान करने, एलएसपी माइग्रेशन प्रक्रिया तत्काल प्रारंभ करने तथा टोकन सेवा राशि 50 रुपये से बढ़ाकर 100 रुपये प्रति सेवा करने की मांग की गई। साथ ही मांगों का समाधान नहीं होने पर 15 अगस्त 2026 के बाद जयपुर स्थित मुख्यमंत्री आवास के बाहर अनिश्चितकालीन धरना देने की चेतावनी भी दी गई है।
ज्ञापन में बताया गया कि पिछले करीब दस वर्षों से ग्राम पंचायत स्तर पर ई-मित्र प्लस ऑपरेटर एवं ई-मित्र संचालक राजस्थान सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं एवं डिजिटल सेवाओं का संचालन कर रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में नागरिकों को सैकड़ों सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराने तथा योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इसके बावजूद आज तक उन्हें नियमित मानदेय, सेवा सुरक्षा अथवा संविदा का लाभ नहीं मिला है। इसलिए उन्हें संविदा सेवा नियमों में शामिल कर मासिक मानदेय एवं अन्य सेवा लाभ दिए जाने की मांग की गई।
संघ ने सरकारी शिविरों में लगाई जाने वाली ड्यूटी के लिए भी उचित पारिश्रमिक देने की मांग उठाई है। ज्ञापन में कहा गया कि प्रशासनिक एवं जनकल्याणकारी शिविरों में ई-मित्र संचालकों से अतिरिक्त समय तक सेवाएं ली जाती हैं। इस दौरान उन्हें अपने संसाधनों, कंप्यूटर, प्रिंटर एवं इंटरनेट का उपयोग करना पड़ता है, लेकिन इसके बदले कोई ड्यूटी भत्ता या यात्रा व्यय नहीं दिया जाता। ऐसे में सरकार को निर्धारित दर के अनुसार भत्ता उपलब्ध कराना चाहिए।
संचालकों ने एलएसपी माइग्रेशन प्रक्रिया तत्काल शुरू करने की मांग करते हुए कहा कि यदि कोई एलएसपी समय पर तकनीकी सहायता या प्रशिक्षण उपलब्ध नहीं कराता है तो संचालकों के पास दूसरे एलएसपी से जुड़ने का विकल्प नहीं होता। मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी की तर्ज पर एलएसपी बदलने की सुविधा मिलने से सेवा गुणवत्ता में सुधार होगा और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा भी बढ़ेगी।

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