निजीकरण के विरोध में कर्मचारियों की एकता रंग लाई, सरकार झुकी

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– जोधपुर में 30 अप्रैल का प्रस्तावित प्रदर्शन स्थगित, चेतावनी—फिर उठेगा आंदोलन
हनुमानगढ़।
 विद्युत क्षेत्र के निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के बीच कर्मचारियों की एकजुटता आखिरकार असर दिखाती नजर आई है। विद्युत संयुक्त कर्मचारी संघर्ष समिति, जोधपुर के सदस्यों ने बुधवार को घोषणा करते हुए बताया कि सरकार द्वारा कर्मचारियों की मांगों को स्वीकार करने के बाद 30 अप्रैल को जोधपुर स्थित प्रबंध निदेशक कार्यालय पर प्रस्तावित विशाल प्रदर्शन को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है।
बैठक में सभी संगठनों ने एक स्वर में कर्मचारियों की एकता को आंदोलन की सबसे बड़ी ताकत बताया और भविष्य में भी इसी प्रकार संगठित रहने का संकल्प लिया।
विद्युत संयुक्त कर्मचारी संघर्ष समिति के प्रतिनिधि मीनू शर्मा, अरविंद गढ़वाल, राजेंद्र सीकर, शैलेंद्र महला, पंकज श्योराण, मोहित शर्मा, आत्माराम, दिलावर सिंह, संदीप बेनीवाल और पंकज सहित अन्य नेताओं ने बताया कि श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ विद्युत संयुक्त कर्मचारी संघ के बैनर तले 27 अप्रैल को किया गया विशाल प्रदर्शन इस पूरे घटनाक्रम में निर्णायक साबित हुआ। इस प्रदर्शन में कर्मचारियों ने बिना किसी उग्रता के शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात सरकार तक पहुंचाई, जिसके बाद सरकार को अपना रुख नरम करना पड़ा।
प्रतिनिधियों ने बताया कि आंदोलन के बाद सोशल मीडिया के माध्यम से जारी वीडियो में यह स्पष्ट किया गया है कि जोधपुर विद्युत वितरण निगम के किसी भी जिले में फिलहाल निजीकरण की कोई प्रक्रिया नहीं चल रही है। इस आश्वासन के बाद ही कर्मचारियों ने 30 अप्रैल को प्रस्तावित प्रदर्शन को स्थगित करने का निर्णय लिया है। उन्होंने बताया कि 1 अप्रैल को जयपुर में ऊर्जा सचिव आरती डोगरा के साथ संयुक्त संघर्ष समिति की बैठक होगी जिसमें वार्ता के बाद आगामी रणनीति तय की जाएगी।

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