इस साल गर्मी सारे रिकॉर्ड तोड़ सकती है! मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक 2026 में ‘सुपर अल नीनो’ (Super El Nino ) बनने की आशंका है, जिससे देश में भीषण गर्मी, लंबी हीटवेव और कमजोर मानसून देखने को मिल सकता है। आखिर क्या है अल नीनो और क्यों इससे बढ़ जाती है भारत की टेंशन?
दरअसल, वैज्ञानिकों की मानें तो भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में एक शक्तिशाली ‘सुपर एल-नीनो’ आकार ले रहा है, जो 1877 के बाद की सबसे विनाशकारी मौसम संबंधी घटना साबित हो सकता है। इसका सीधा असर भारत पर भी देखने को मिलेगा, क्योंकि एल-नीनो भारत की लाइफलाइन कहे जाने वाले दक्षिण-पश्चिम मानसून को भी प्रभावित करने वाला है।

क्या है सुपर एल-नीनो और इसके इफेक्ट से क्यों बढ़ेगी गर्मी?
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, सुपर एल-नीनो तब होता है जब समुद्र की सतह के तापमान का तीन महीने का औसत दीर्घकालिक औसत की तुलना में 1.5 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चला जाता है। ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक, इस बार समुद्र की सतह के तापमान में वृद्धि तीन डिग्री सेल्सियस से अधिक हो सकती है, यह 1877 में दर्ज किए गए वर्तमान ज्ञात उच्चतम स्तर 2.7 डिग्री सेल्सियस को पार कर जाएगी। जिसका असर भारत समेत दुनिया के कई देशों में सूखा, बाढ़ और भीषण गर्मी जैसी स्थिति देखने को मिलेगा।
एल-नीनो अगर मजबूत होता है तो यह सबसे पहले दक्षिण-पश्चिम मानसून को ही प्रभावित करेगा। जिससे वर्षा और देश में होने वाली कुल वर्षा में कमी आएगी। भारत के मौसम विभाग ने पहले ही भविष्यवाणी कर दी है कि इस मौसम में भारत में केवल लगभग 800 मिमी बारिश हो सकती है। इससे खरीफ मौसम के लिए मानसून की बारिश पर निर्भर रहने वाले देश के लगभग 60 प्रतिशत किसानों के लिए भारी संकट उत्पन्न हो सकता है। सिर्फ ये ही नहीं कई अन्य सकंट भी पैदा हो सकते हैं अर्थव्यवस्था तक सकंट में आ सकती है।
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