-डॉक्टर्स फॉर सोसायटी के तीसरे लगातार रविवार सेमीनार में स्वास्थ्य, पर्यावरण और जागरूकता पर हुआ मंथन
हनुमानगढ़। बढ़ते प्रदूषण, प्लास्टिक के अंधाधुंध उपयोग और बदलती जीवनशैली से मानव स्वास्थ्य पर पड़ रहे गंभीर दुष्प्रभावों को लेकर रविवार को हनुमानगढ़ जंक्शन स्थित दुर्गा मंदिर धर्मशाला में डॉक्टर्स फॉर सोसायटी द्वारा लगातार तीसरे रविवार जागरूकता सेमीनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि फाउंडेशन के संरक्षक डॉ. पारस जैन, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) अध्यक्ष डॉ. एसएस गेट थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता फाउंडेशन अध्यक्ष डॉ. विक्रम जैन ने की। कार्यशाला में बड़ी संख्या में शहरवासियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा चिकित्सकों ने भाग लिया।
आयोजन समिति सचिव डॉ. नरेश संकलेजा ने प्लास्टिक को “कलयुग का भस्मासुर” बताते हुए कहा कि यह मानव जीवन के लिए धीरे-धीरे सबसे बड़ा खतरा बनता जा रहा है।
सेमीनार में डॉ. वरूण आहुजा ने कहा कि आज प्लास्टिक हमारे दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। पानी की बोतलें, खाद्य पदार्थों की पैकिंग, प्लास्टिक की थैलियां और अन्य उपयोगी वस्तुएं धीरे-धीरे मानव शरीर को अंदर से खोखला कर रही हैं। वक्ताओं ने कहा कि जब प्लास्टिक जलता या नष्ट होता है तो वह नैनो और माइक्रो प्लास्टिक पार्टिकल्स में बदल जाता है, जो हवा, पानी और भोजन के माध्यम से मानव शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। यही नैनो पार्टिकल्स आगे चलकर कैंसर, हार्माेन असंतुलन, डायबिटीज, सांस संबंधी रोगों और अन्य गंभीर बीमारियों का कारण बन रहे हैं।
संरक्षक डॉ. पारस जैन ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि बीते दो दशकों में कैंसर जैसी बीमारियों में तेजी से वृद्धि हुई है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि वर्ष 2006 के आसपास सालभर में एक-दो कैंसर मरीज ही सामने आते थे, लेकिन वर्ष 2012 तक स्थिति यह हो गई कि छह मरीजों में से दो या तीन मरीज कैंसर से पीड़ित मिलने लगे। वर्तमान समय में हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि अब प्रत्येक सप्ताह में एक या दो नए कैंसर मरीज सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह आंकड़े केवल चिकित्सा क्षेत्र के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए चिंता का विषय हैं।
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